राजस्थान के 600 कॉलेजों में हलचल, 2500 सहायक आचार्यों पर संकट? नए नियमों से बढ़ी चिंता
राजस्थान के 600 कॉलेजों में हलचल, 2500 सहायक आचार्यों पर संकट? नए नियमों से बढ़ी चिंता
Vidya Sambal Yojana Rajasthan: राजस्थान के सरकारी कॉलेजों में पिछले करीब पांच वर्षों से सेवाएं दे रहे लगभग ढाई हजार सहायक आचार्यों के सामने अब असमंजस की स्थिति खड़ी हो गई है। प्रदेश के 600 से अधिक कॉलेजों में विद्या संबल योजना के तहत कार्यरत इन शिक्षकों को नई प्रस्तावित संविदा भर्ती के चलते अपनी नौकरी पर संकट मंडराता दिख रहा है।
उच्च शिक्षा विभाग द्वारा ‘टीचिंग एसोसिएट’ पदों पर नई भर्ती की तैयारी की खबर के बाद असंतोष खुलकर सामने आ गया। सोमवार को राजधानी जयपुर स्थित शहीद स्मारक पर प्रदेशभर से पहुंचे सहायक आचार्यों ने विरोध-प्रदर्शन कर अपनी आवाज बुलंद की।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि विभाग कर्मचारी चयन बोर्ड के माध्यम से नई संविदा भर्ती की प्रक्रिया शुरू करने जा रहा है। उनका आरोप है कि यदि ऐसा हुआ तो वर्तमान में विद्या संबल योजना के तहत कार्यरत शिक्षकों की सेवाएं समाप्त हो सकती हैं।
योग्यता के बावजूद असुरक्षा का माहौल:-
सहायक आचार्य डॉ. राम सिंह सामोता ने कहा कि इन शिक्षकों की नियुक्ति University Grants Commission (UGC) रेगुलेशन-2018 के प्रावधानों के अनुसार की गई थी। 100 अंकों के API स्कोर, पीएचडी, NET/SET और शोध प्रकाशनों जैसी अनिवार्य योग्यताओं के बाद चयन हुआ था। ऐसे में अब अस्थायी नई भर्ती करना योग्य अभ्यर्थियों के साथ अन्याय होगा।
संघ के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. रवीन्द्र सिंह यादव ने इसे मेहनती और योग्य शिक्षकों के सम्मान पर चोट बताया। वहीं प्रदेश महामंत्री डॉ. उपदेश शर्मा ने कहा कि इस फैसले से राज्य में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द स्पष्ट नीति और आश्वासन नहीं दिया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
सहायक आचार्यों की प्रमुख मांगें:-
- हरियाणा सरकार की तर्ज पर सेवा सुरक्षा और रोजगार गारंटी दी जाए।
- नई संविदा भर्ती से पहले वर्तमान विद्या संबल शिक्षकों की स्क्रीनिंग कर सेवाएं सुरक्षित की जाएं।
- वेतन का नियमित मासिक भुगतान सुनिश्चित हो और बकाया समस्याओं का समाधान किया जाए।
- राजसेस पदों पर कार्यरत शिक्षकों को ट्रांसफर या डेपुटेशन से प्रभावित न किया जाए।