Rajasthan Private Bus Strike: प्रदेशभर में प्राइवेट बसों का चक्का जाम, 25 लाख यात्री प्रभावित, परिवहन सेवाएं ठप

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Rajasthan Private Bus Strike: प्रदेशभर में प्राइवेट बसों का चक्का जाम, 25 लाख यात्री प्रभावित, परिवहन सेवाएं ठप

Rajasthan Private Bus Strike: राजस्थान में मंगलवार से प्राइवेट बस संचालकों की हड़ताल के चलते परिवहन व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो गई है। रात 12 बजे से कॉन्ट्रैक्ट और स्टेज कैरिज श्रेणी की निजी बसों का संचालन बंद कर दिया गया, जिससे शहरों के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों में भी यात्रियों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है।

हड़ताल के कारण 23 से 28 फरवरी तक की ऑनलाइन टिकट बुकिंग भी स्थगित कर दी गई है। लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों को सबसे ज्यादा दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है।

40 हजार बसें ठप, लाखों यात्री प्रभावित:-

बताया जा रहा है कि हड़ताल में करीब 30 हजार निजी बसें और 10 हजार स्लीपर कोच शामिल हैं। इससे प्रतिदिन यात्रा करने वाले लगभग 25 लाख यात्री सीधे तौर पर प्रभावित हो सकते हैं। बस सेवाएं बंद होने के बाद रेलवे और रोडवेज बसों में अचानक भीड़ बढ़ गई है, जिससे टिकट मिलना मुश्किल हो गया है।

ऑपरेटर्स का आरोप – नियमों की आड़ में सख्ती:-

जयपुर सहित प्रदेशभर के बस ऑपरेटर्स का कहना है कि परिवहन विभाग नए मोटर व्हीकल एक्ट के प्रावधानों को पुरानी बसों पर भी लागू कर रहा है। उनका आरोप है कि एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा रहा है और कई बार यात्रियों को बीच रास्ते में ही बस से उतार दिया जाता है। इससे यात्रियों और संचालकों दोनों को नुकसान उठाना पड़ रहा है।

वार्ता बेनतीजा, हड़ताल जारी:-

बस संचालकों का कहना है कि वे लंबे समय से विभाग से बातचीत कर रहे थे, लेकिन समाधान नहीं निकलने पर उन्हें अनिश्चितकालीन हड़ताल का निर्णय लेना पड़ा। चेतावनी दी गई है कि यदि मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं हुआ तो आंदोलन और लंबा चल सकता है।

यात्रियों की बढ़ी परेशानी:-

अचानक सेवाएं बंद होने से कई लोगों की यात्रा योजनाएं प्रभावित हो गई हैं। परीक्षा, इलाज, नौकरी और पारिवारिक कार्यक्रमों के लिए सफर करने वाले यात्री खासे परेशान हैं। ग्रामीण रूटों पर हालात ज्यादा गंभीर बताए जा रहे हैं।

करोड़ों के नुकसान का अनुमान:-

हड़ताल के चलते प्रतिदिन करीब 20 करोड़ रुपये के राजस्व नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है। परिवहन व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए सरकार और विभाग पर जल्द समाधान निकालने का दबाव बढ़ता जा रहा है।