Rajasthan Solar Energy : सोलर ऊर्जा पर ADB की रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा, ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने दिए नए निर्देश
Rajasthan Solar Energy : सोलर ऊर्जा पर ADB की रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा, ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने दिए नए निर्देश
Rajasthan Solar Energy : राजस्थान में सौर ऊर्जा के तेज विस्तार ने बिजली वितरण व्यवस्था की पारंपरिक संरचना को चुनौती दी है। एशियन डवलपमेंट बैंक (एडीबी) की कंसल्टेंसी रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि राज्य का वितरण नेटवर्क मूल रूप से एकतरफा बिजली आपूर्ति के लिए विकसित किया गया था, लेकिन अब बढ़ते रूफटॉप और फीडर-लेवल सोलर संयंत्रों के कारण तकनीकी जटिलताएं सामने आ रही हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक दिन के समय अत्यधिक सौर उत्पादन से रिवर्स पावर फ्लो और ओवर-वोल्टेज की स्थिति बन रही है, जबकि शाम के समय मांग अचानक बढ़ने से पीक लोड का दबाव बढ़ जाता है। रियल-टाइम मॉनिटरिंग और स्मार्ट कंट्रोल सिस्टम की कमी के चलते पावर क्वालिटी और ग्रिड स्थिरता प्रभावित हो रही है। कई क्षेत्रों में इन्वर्टर ट्रिपिंग और अन्य तकनीकी बाधाएं भी दर्ज की गई हैं।
बैटरी स्टोरेज पर जोर:-
एडीबी ने समाधान के तौर पर बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) को जरूरी बताया है। इससे दोपहर में अतिरिक्त सौर ऊर्जा को स्टोर कर शाम के पीक समय में उपयोग किया जा सकेगा। साथ ही स्मार्ट सब-स्टेशन, एडवांस मीटरिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और आधुनिक ग्रिड कंट्रोल सिस्टम लागू करने की सिफारिश की गई है। ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने अधिकारियों को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप ठोस योजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं।
सोलर क्षमता: वर्तमान और लक्ष्य
- प्रदेश में फिलहाल करीब 42 गीगावाट अक्षय ऊर्जा क्षमता स्थापित हो चुकी है।
- वर्ष 2030 तक 125 गीगावाट क्षमता हासिल करने का लक्ष्य तय किया गया है।
- 64.5 गीगावाट के नए प्रोजेक्ट प्रस्तावित हैं, जिन पर काम प्रगति पर है।
बढ़ती मांग, बढ़ती चुनौती
ट्रांसमिशन और वितरण नेटवर्क की सीमित क्षमता के कारण उत्पादित सौर ऊर्जा का पूरा उपयोग नहीं हो पा रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रिड को मजबूत किए बिना सौर विस्तार की रफ्तार को टिकाऊ बनाना मुश्किल होगा।
केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण के रिसोर्स एडिक्वेसी प्लान के अनुसार अगले दशक में राज्य की बिजली मांग बढ़कर 32,160 मेगावाट तक पहुंच सकती है, जबकि वर्तमान अधिकतम मांग लगभग 19,500 मेगावाट रही है। ऐसे में उत्पादन के साथ-साथ ट्रांसमिशन और वितरण नेटवर्क का आधुनिकीकरण भी अनिवार्य माना जा रहा है।
ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने कहा कि सौर ऊर्जा का विस्तार राज्य के लिए बड़ा अवसर है। तकनीकी चुनौतियों से निपटने के लिए वितरण और ट्रांसमिशन ग्रिड को स्मार्ट और भविष्य के अनुरूप तैयार किया जा रहा है, ताकि ऊर्जा आपूर्ति सुरक्षित और स्थिर बनी रहे।