सीमांत क्षेत्र में अवैध साहूकारी के खिलाफ फूटा आक्रोश, पीड़ित परिवारों ने किया प्रदर्शन

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मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन, लेन-देन, संपत्तियों और आय के स्रोतों की निष्पक्ष जांच की उठाई मांग

खाजूवाला, सीमांत क्षेत्र में कथित अवैध साहूकारी एवं कर्ज से जुड़े विवादों को लेकर बुधवार को खाजूवाला में बड़ी संख्या में पीड़ित परिवारों, महिलाओं और क्षेत्रवासियों ने उपखंड कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। भाजपा पंचायत राज प्रकोष्ठ के प्रदेश सदस्य जगविन्द्र सिंह सिद्धू के नेतृत्व में आयोजित इस प्रदर्शन के बाद मुख्यमंत्री के नाम उपखंड अधिकारी के माध्यम से ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच और दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की गई।

प्रदर्शन के दौरान उपस्थित लोगों ने आरोप लगाया कि आर्थिक तंगी से जूझ रहे जरूरतमंद परिवारों को कर्ज उपलब्ध कराने के नाम पर कई मामलों में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। उनका कहना था कि समय के साथ ब्याज और अन्य शर्तों के कारण विवाद उत्पन्न हो रहे हैं तथा कई परिवार अपनी जमीन और संपत्ति को लेकर कानूनी उलझनों में फंस गए हैं। प्रदर्शनकारियों ने ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।

“आर्थिक मजबूरी किसी के शोषण का माध्यम नहीं बननी चाहिए”

सीमांत क्षेत्र में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को राहत और सहयोग की आवश्यकता होती है, लेकिन यदि उनकी मजबूरी का लाभ उठाकर नियमों के विपरीत आर्थिक लेन-देन किए जा रहे हैं तो यह अत्यंत गंभीर विषय है। उन्होंने कहा कि गरीब परिवार की पुश्तैनी जमीन और आवास उसके भविष्य की सबसे बड़ी पूंजी होती है, इसलिए ऐसे मामलों में प्रशासन को संवेदनशीलता और निष्पक्षता के साथ कार्रवाई करनी चाहिए।

साहूकारी कानून के तहत जांच की मांग

ज्ञापन में राजस्थान साहूकार अधिनियम, 1963 धारा 29 के प्रावधानों का उल्लेख करते हुए मांग की गई कि साहूकारी से जुड़े लाइसेंस, ब्याज दर, खातों, लेन-देन के रिकॉर्ड एवं अन्य दस्तावेजों की जांच कराई जाए। यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

संपत्तियों और रजिस्ट्रियों की भी हो जांच

प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि कर्ज की गारंटी के नाम पर कराई गई जमीन, प्लॉट और अन्य संपत्तियों की रजिस्ट्रियों की प्रकरणवार जांच कराई जाए। साथ ही संबंधित व्यक्तियों की चल-अचल संपत्तियों एवं आय के स्रोतों की भी सक्षम एजेंसियों से जांच कराई जाए, ताकि यदि किसी प्रकार की अवैध संपत्ति अर्जित की गई हो तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जा सके।

पीड़ितों ने सुनवाई में तेजी लाने की उठाई मांग

प्रदर्शन के दौरान कई पीड़ित परिवारों ने अपनी शिकायतों के समाधान में देरी पर चिंता जताई। इस पर सिद्धू ने कहा कि सभी मामलों की पारदर्शी और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए तथा कानून सभी के लिए समान है। किसी भी व्यक्ति को कानून से ऊपर नहीं माना जा सकता।

ज्ञापन में प्रमुख मांगें

अवैध साहूकारी की शिकायतों की विशेष जांच।

साहूकारी लाइसेंस एवं लेन-देन के रिकॉर्ड का सत्यापन।

जमीन, प्लॉट एवं संपत्ति संबंधी रजिस्ट्रियों की प्रकरणवार जांच।

संबंधित व्यक्तियों की चल-अचल संपत्तियों एवं आय के स्रोतों की जांच।

पीड़ित परिवारों की शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई।

दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई।

प्रदर्शन में सुरेन्द्र चहल, हनुमान सांखला, हरफूल बिश्नोई, संतराम, पवन बिश्नोई, सुरेन्द्र सिंह, वीरेन्द्र सिंह, सुरजीत सिंह, अजय सिहाग, रामचन्द्र बिश्नोई, जगरूप सिंह, नछत्तर सिंह, दुलीराम, राजेन्द्र, विजय सिहाग, गुरविन्द्र कौर, कुलविन्द्र कौर, मनदीप, परमजीत, शीलवंती, अनिश्का, रमा देवी, धर्मपाल, तारा सिंह एवं रामस्वरूप बिश्नोई सहित बड़ी संख्या में पीड़ित परिवार, महिलाएं एवं क्षेत्रवासी उपस्थित रहे।

संपादकीय टिप्पणी: इस समाचार में उल्लिखित आरोप प्रदर्शनकारियों द्वारा सौंपे गए ज्ञापन एवं उनके बयानों पर आधारित हैं। इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मामला संबंधित प्रशासनिक एवं कानूनी प्रक्रिया के अधीन है।

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