फर्जी व्यक्ति बनकर जमीन की रजिस्ट्री कराने का प्रयास, तहसीलदार की सतर्कता से बड़ा फर्जीवाड़ा बेनकाब

मूल खातेदार की मौत के बाद फर्जी आधार-पैन के सहारे बैनामा कराने की साजिश, पांच नामजद आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज
खाजूवाला | Rkhabar
खाजूवाला तहसील कार्यालय में जमीन की फर्जी रजिस्ट्री कराने का बड़ा प्रयास तहसील प्रशासन की सतर्कता से विफल हो गया। मृत खातेदार के नाम पर एक फर्जी व्यक्ति को असली मालिक बताकर भूमि का बैनामा पंजीकृत कराने की कोशिश की गई, लेकिन समय रहते मामले का खुलासा होने पर तहसीलदार एवं उप पंजीयक ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने पांच नामजद आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचना और आपराधिक षड्यंत्र सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
थानाधिकारी अशोक बिश्नोई ने बताया कि 27 जुलाई की शाम करीब 4:30 बजे चक 6 बीजीएम स्थित कृषि भूमि के दो बैनामे पंजीयन के लिए खाजूवाला तहसील कार्यालय में प्रस्तुत किए गए। दस्तावेजों की औपचारिक जांच के दौरान विक्रेता दानाराम के परिजनों ने आपत्ति दर्ज कराते हुए बताया कि रजिस्ट्री कराने आया व्यक्ति वास्तविक दानाराम नहीं है, बल्कि किसी अन्य व्यक्ति को उसकी जगह खड़ा किया गया है। परिजनों ने यह भी बताया कि भूमि के वास्तविक खातेदार दानाराम का पहले ही निधन हो चुका है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए तहसीलदार एवं उप पंजीयक हरिश कुमार टाक ने तत्काल दस्तावेजों की विस्तृत जांच करवाई। जांच के दौरान प्रस्तुत आधार कार्ड एवं पैन कार्ड प्रथम दृष्टया कूटरचित पाए गए। इसके अलावा राजस्व रिकॉर्ड और अन्य अभिलेखों के सत्यापन में यह भी सामने आया कि जिस व्यक्ति को दानाराम बताकर पेश किया गया, उसके नाम से तहसील क्षेत्र में कोई भूमि दर्ज नहीं है।
प्रथम दृष्टया पूरे प्रकरण में सुनियोजित फर्जीवाड़ा और धोखाधड़ी सामने आने पर तहसीलदार हरिश कुमार टाक ने खाजूवाला पुलिस थाने में लिखित रिपोर्ट दर्ज कराई। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि मृत खातेदार के नाम पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर आपसी मिलीभगत से भूमि की रजिस्ट्री कराने की साजिश रची गई।
पुलिस ने तहसीलदार की रिपोर्ट के आधार पर कथित फर्जी विक्रेता दानाराम, खरीदार वेद प्रकाश, गवाह राजूराम, अन्नाराम तथा अन्य संबंधित व्यक्ति के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस अब फर्जी आधार एवं पैन कार्ड तैयार करने, दस्तावेजों की सत्यता, आरोपियों की भूमिका तथा पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है।
तहसील प्रशासन की समय पर बरती गई सतर्कता से करोड़ों रुपये मूल्य की भूमि के संभावित फर्जी हस्तांतरण को रोका जा सका। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।