थार के रेगिस्तान में जल क्रांति की नई इबारत: 28 किमी परिधि की विशाल कृत्रिम झील तैयार, लाखों परिवारों को मिलेगा लाभ

जयपुर। Rkbabar
राजस्थान के थार मरुस्थल में जल संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल हुई है। जल जीवन मिशन के तहत इंदिरा गांधी नहर परियोजना की मुख्य नहर पर जैसलमेर जिले के घांटियाली क्षेत्र में आरडी-1356 (बुर्जी 1356) पर लगभग 28 किलोमीटर परिधि वाली विशाल कृत्रिम झील (एस्केप रिजर्वायर) का निर्माण पूरा हो गया है। मानसून के दौरान पंजाब की ओर से आने वाला अतिरिक्त पानी अब इस जलाशय में संग्रहित किया जाएगा, जिससे वर्षों से बेकार बहने वाले लाखों घन फीट पानी का उपयोग पेयजल आपूर्ति के लिए किया जा सकेगा।
यह परियोजना न केवल मरुस्थलीय क्षेत्रों में जल संकट को कम करेगी, बल्कि जैसलमेर और बाड़मेर सहित पश्चिमी राजस्थान के हजारों गांवों के लिए लंबे समय तक सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
बेकार बहने वाला पानी अब होगा उपयोग में
इंदिरा गांधी मुख्य नहर में शुरुआत से ही कई स्थानों पर एस्केप संरचनाएं बनाई गई थीं, जिनका उद्देश्य नहर में अधिक जल प्रवाह या आपात स्थिति के दौरान अतिरिक्त पानी को सुरक्षित बाहर निकालना था। लेकिन मानसून के समय सिंचाई की मांग कम होने पर बड़ी मात्रा में पानी अंतरराष्ट्रीय सीमा की ओर बहकर व्यर्थ चला जाता था।
इस समस्या का स्थायी समाधान निकालने के लिए जल जीवन मिशन के तहत इन एस्केप संरचनाओं को विशाल जलाशयों में विकसित करने की योजना बनाई गई, ताकि अतिरिक्त पानी को सुरक्षित संग्रहित कर भविष्य में पेयजल योजनाओं के लिए उपयोग किया जा सके।
चार एस्केप रिजर्वायर की योजना
राज्य सरकार ने इंदिरा गांधी नहर परियोजना क्षेत्र में चार प्रमुख एस्केप रिजर्वायर विकसित करने की मंजूरी दी थी—
- आरडी-507, सत्तासर (बीकानेर)
- आरडी-750, गजनेर लिफ्ट परियोजना क्षेत्र (बीकानेर)
- आरडी-1121, जोधपुर
- आरडी-1356 (बुर्जी), जैसलमेर
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में परियोजना कार्यों में तेजी लाई गई। वर्तमान में आरडी-507 और बुर्जी-1356 जलाशयों का निर्माण पूरा हो चुका है, जबकि अन्य परियोजनाओं पर भी कार्य प्रगति पर है।
20 लाख से अधिक परिवारों को मिलेगा लाभ
इन चारों जलाशयों के माध्यम से जल जीवन मिशन की 43 वृहद पेयजल परियोजनाओं को अतिरिक्त पानी उपलब्ध कराया जाएगा। इससे प्रदेश के 6,707 गांवों के 20 लाख से अधिक परिवारों को दीर्घकालिक पेयजल सुविधा का लाभ मिलेगा। इससे नहरबंदी या जल संकट के समय भी पेयजल आपूर्ति प्रभावित नहीं होगी।
1406 एमसीएफटी पानी होगा संग्रहित
बुर्जी-1356 एस्केप रिजर्वायर की औसत गहराई लगभग 13 मीटर है और इसमें 1406 एमसीएफटी पानी संग्रहित किया जा सकेगा। जलाशय के निर्माण में आधुनिक तकनीक का उपयोग किया गया है। इसकी तली और ढलानों पर एचडीपीई (HDPE) शीट बिछाई गई है, जिससे रेतीली जमीन में पानी का रिसाव नहीं होगा और लंबे समय तक जल सुरक्षित रहेगा।
रेगिस्तान में दिखेगा समंदर जैसा नजारा
मानसून के दौरान जब अतिरिक्त पानी इस विशाल जलाशय में भरेगा तो थार के रेतीले विस्तार के बीच यह झील किसी समंदर से कम दिखाई नहीं देगी। जल संरक्षण की दृष्टि से यह परियोजना राजस्थान के लिए मील का पत्थर मानी जा रही है।
जल सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना पश्चिमी राजस्थान में पेयजल संकट को कम करने के साथ-साथ भविष्य की जल आवश्यकताओं को पूरा करने में भी अहम भूमिका निभाएगी। जल जीवन मिशन के तहत तैयार किए गए ये एस्केप रिजर्वायर राज्य में जल प्रबंधन का नया मॉडल बनकर उभर रहे हैं।