Rajasthan: भारत-PAK सरहद का नया ‘सुरक्षा ब्लूप्रिंट’, बाड़मेर-जैसलमेर सहित 4 जिले ‘स्पेशल वॉच जोन’ घोषित

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राजस्थान से लगती भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सीमा पार से होने वाली नापाक हरकतों, नशीले पदार्थों की तस्करी और आधुनिक ड्रोन तकनीक के जरिए होने वाली घुसपैठ को पूरी तरह नेस्तनाबूद करने के लिए गृह मंत्रालय के आदेश पर सुरक्षा का एक नया ब्लूप्रिंट तैयार कर धरातल पर लागू कर दिया गया है।

नई व्यवस्था के तहत राजस्थान के चार सीमावर्ती जिले—बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर और श्रीगंगानगर—को ‘स्पेशल वॉच जोन’ घोषित किया गया है। अब इन जिलों में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ), जिला प्रशासन, स्थानीय पुलिस तथा केंद्रीय और राज्य स्तरीय खुफिया एजेंसियां संयुक्त समन्वय के साथ कार्य करेंगी। इस पहल का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे 50 किलोमीटर के दायरे में सुरक्षा निगरानी को और प्रभावी बनाना है।

सीमा सुरक्षा का दायरा बढ़ाया गया:-

पश्चिमी राजस्थान की सीमा सामरिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील मानी जाती है। इसी संवेदनशीलता को देखते हुए अब गृह मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय सीमा की सुरक्षा को लेकर विशेष एहतियात बरतने के निर्देश जारी किए हैं। नए ब्लूप्रिंट के अनुसार, अब सीमा सुरक्षा केवल बॉर्डर की चौकियों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि बॉर्डर के अंदरूनी 50 किलोमीटर के दायरे में एक विशेष सुरक्षा कवच तैयार किया जा रहा है।

नए सुरक्षा ढांचे के तहत जिला कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, खुफिया एजेंसियों के अधिकारी और बीएसएफ के वरिष्ठ अधिकारी नियमित बैठकें कर सूचनाओं और रणनीतिक इनपुट का आदान-प्रदान करेंगे। इसका सीधा मतलब यह है कि अब सीमावर्ती क्षेत्रों में प्रशासनिक और सैन्य तालमेल पहले से कहीं अधिक मजबूत और त्वरित होने वाला है।

संदिग्ध तस्करी नेटवर्क पर सख्त निगरानी:-

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय सीमा के दोनों ओर बसे सीमावर्ती गांवों का अतीत में तस्करी और अन्य अवैध गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किए जाने के इनपुट मिलते रहे हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए पुराने और सक्रिय संदिग्ध नेटवर्क की दोबारा समीक्षा की जा रही है।

सीमा पार से मादक पदार्थों, जाली मुद्रा और हथियारों की तस्करी से जुड़े मामलों में संदिग्ध व्यक्तियों और स्थानीय संपर्कों की गतिविधियों पर विशेष नजर रखी जाएगी, ताकि किसी भी अवैध नेटवर्क को समय रहते निष्क्रिय किया जा सके।

एंटी-ड्रोन सिस्टम और स्मार्ट लेजर फेंसिंग पर जोर:-

हाल के वर्षों में ड्रोन के माध्यम से हथियार और नशीले पदार्थ गिराने की घटनाओं को देखते हुए सुरक्षा तंत्र में अत्याधुनिक तकनीक को शामिल किया जा रहा है।

  • एंटी-ड्रोन सिस्टम: संदिग्ध ड्रोन की पहचान कर उन्हें तुरंत निष्क्रिय करने के लिए बॉर्डर पर उन्नत तकनीक आधारित एंटी-ड्रोन सिस्टम की तैनाती की जा रही है।
  • स्मार्ट लेजर फेंसिंग: नदी-नालों और कठिन भौगोलिक क्षेत्रों में, जहां पारंपरिक फेंसिंग संभव नहीं है, वहाँ ‘लेजर फेंसिंग’ का जाल बिछाया जा रहा है, जिससे अदृश्य लेजर किरणों के कटते ही सुरक्षा कंट्रोल रूम में तुरंत अलार्म बज जाएगा।

इन छह बिंदुओं पर रहेगा विशेष फोकस:-

सीमा सुरक्षा को केवल हथियारों के दम पर ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक नियंत्रण और खुफिया सूचनाओं के जरिए भी मजबूत किया जा रहा है। इसके लिए नए ब्लूप्रिंट में 6 बहुत ही महत्वपूर्ण और कड़े नियम तय किए गए हैं:

  • सीमावर्ती क्षेत्रों में सभी वैध और अवैध निर्माणों का विस्तृत डेटाबेस तैयार किया जाएगा।
  • पिछले वर्षों में बाहरी कंपनियों और निजी संस्थाओं को आवंटित जमीनों का पुनर्मूल्यांकन किया जाएगा।
  • संवेदनशील इलाकों में सक्रिय गैर-सरकारी संस्थाओं (एनजीओ) की गतिविधियों और फंडिंग की निगरानी की जाएगी।
  • सोशल मीडिया, सैटेलाइट संचार और एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से होने वाले संदिग्ध डिजिटल संपर्कों पर साइबर इंटेलिजेंस के जरिए नजर रखी जाएगी।
  • सीमावर्ती गांवों में तैनात सरकारी और अर्ध-सरकारी कार्मिकों तथा उनके संपर्कों का रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा।
  • अंतरराष्ट्रीय सीमा से 50 किलोमीटर के दायरे में भूमि आवंटन, लीज और खरीद-फरोख्त के लिए सख्त सुरक्षा मानदंड लागू किए जाएंगे।