Rajasthan News: भ्रष्टाचार पर सरकार का बड़ा एक्शन, 1 RAS समेत 26 अफसर बर्खास्त; 435 सस्पेंड

जयपुर। राजस्थान में भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी और विभागीय लापरवाही के मामलों पर राज्य सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए कई अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देश पर चल रही इस कार्रवाई के तहत अब तक एक आरएएस अधिकारी समेत कुल 26 अधिकारियों को सरकारी सेवा से बर्खास्त किया जा चुका है। वहीं, एक आईएएस अधिकारी सहित 435 कर्मचारियों को निलंबित किया गया है। इसके अलावा, वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के मामलों में दोषी पाए गए 28 सेवानिवृत्त अधिकारियों की आजीवन पेंशन रोकने के आदेश भी जारी किए गए हैं।
इन अधिकारियों पर गिरी गाज:-
सरकार ने उन अधिकारियों को सेवा से हटाया है, जिन पर भ्रष्टाचार के आरोप अदालत में साबित हो चुके हैं या गंभीर विभागीय अनियमितताएं सामने आई हैं। बर्खास्त किए गए अधिकारियों में आरएएस अधिकारी नर सिंह, सामाजिक न्याय विभाग के तत्कालीन अतिरिक्त निदेशक सुरेंद्र सिंह, पर्यटन विभाग के संजय पांडे, कृषि उपनिदेशक डॉ. पीआर खींची और राजेश कुमार नैनावत, पीडब्ल्यूडी के तत्कालीन विकास अधिकारी भरत प्रकाश मेघवाल शामिल हैं।
इनके अलावा सहायक आचार्य डॉ. सुनील व्यास और वैजयंती मीणा, खनिज अभियंता अनिल खिमेसरा, सहायक आयुक्त महावीर सिंह आसीवाल, प्रवक्ता प्रियंका दिवाकर, कृषि अधिकारी शीना लुकोश, व्याख्याता अमृत लाल मीणा, लेखा सेवा के नरेंद्र तंवर तथा चिकित्सा अधिकारी डॉ. संतोष कुमार, डॉ. राम मोहन सिंह चौहान, डॉ. मुरलीधर शर्मा और डॉ. मनोहर लाल को भी सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है।
रिटायर्ड अफसरों की पेंशन भी रोकी:-
सरकार ने भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग के मामलों में सेवानिवृत्त अधिकारियों पर भी कार्रवाई की है। जांच में दोषी पाए गए 28 अधिकारियों की आजीवन पेंशन और ग्रेच्युटी स्थायी रूप से रोक दी गई है। इनमें आरएएस फतेह राय सोनी, यूआईटी अलवर के तत्कालीन उप सचिव बनवारी लाल मीणा, आरपीएस ओमप्रकाश चंदोलिया और खान विभाग के अतिरिक्त निदेशक राकेश हीरात प्रमुख हैं। वहीं, झालावाड़ के तत्कालीन वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. विलास राव गुल्हाने को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी गई है।
108 मामलों में अभियोजन स्वीकृति:-
एंटी करप्शन ब्यूरो और अन्य जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के आधार पर सरकार ने 108 मामलों में अभियोजन स्वीकृति जारी कर दी है। इन मामलों में आय से अधिक संपत्ति, ट्रैप और पद के दुरुपयोग जैसे आरोप शामिल हैं, जिनमें अब अदालत में सुनवाई होगी। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17-ए के तहत 37 मामलों में भी प्रशासनिक कार्रवाई की गई है। वर्तमान में विभिन्न विभागों से जुड़े 577 मामलों की जांच जारी है, जबकि अखिल भारतीय सेवा (AIS) के 9 अधिकारियों से संबंधित फाइलें प्रक्रियाधीन हैं।
जवाबदेही पर सरकार सख्त:-
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने स्पष्ट किया है कि पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन सरकार की प्राथमिकता है। बिना वजह फाइलें लंबित रखने, सरकारी धन के दुरुपयोग और आमजन के काम में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। सरकार ने साफ संकेत दिए हैं कि जवाबदेही से बचने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।