डॉक्टर-बेटे की मौत के बाद पिता ने भी दम तोड़ा, कर्ज लेकर एमबीबीएस कराया, खाना-पीना छोड़ा

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डॉक्टर-बेटे की मौत के बाद पिता ने भी दम तोड़ा, कर्ज लेकर एमबीबीएस कराया, खाना-पीना छोड़ा

जिस बेटे को कर्ज लेकर डॉक्टर बनाया, उसके सपने पूरे किए, उसी बेटे की अर्थी को कंधा देने के बाद एक बुजुर्ग पिता पूरी तरह टूट गए। बेटे की मौत के 18 दिन बाद ही इस पिता की भी जान चली गई। दांता, सांचौर (जालोर) के रहने वाले बाबूलाल विश्नोई (64) की 3 मई की रात हार्ट अटैक से मौत हो गई। करीब 18 दिन पहले ही बाबूलाल के बेटे डॉ. शैलेष विश्नोई (34) की सड़क हादसे में जान चली गई थी। वह अपनी पत्नी और बच्चों के साथ पाली शहर के नया गांव क्षेत्र में रहते थे। 16 अप्रैल की रात पाली के ट्रांसपोर्ट नगर में खाना खाकर लौटते समय गुर्जर हॉस्टल के पास मोड़ पर डंपर से डॉ. शैलेष की कार की टक्कर हो गई थी। हादसे में शैलेष की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि साथी गौरव सिंह (30) निवासी धिंगाणा (जेतपुर, पाली) घायल हो गए थे।

शिक्षा विभाग से रिटायर प्रशासनिक अधिकारी बाबूलाल विश्नोई अपने बेटे शैलेष की मौत के बाद से गहरे सदमे में थे। परिजनों ने बताया कि उन्होंने खाना-पीना लगभग छोड़ दिया था। वे अक्सर अपने पोते सुमित (13) और पोती सिमरन (9) को गले लगाकर रोते थे। वे बार-बार एक ही बात कहते थे- हर पिता चाहता है कि बुढ़ापे में बेटा उसे कंधा दे, लेकिन मुझे अपने जवान बेटे की अर्थी को कंधा देना पड़ा।