राजस्थान हाईकोर्ट का अहम फैसला, पंचायत-निकाय चुनाव 31 जुलाई तक कराने के निर्देश; पढ़ें खबर

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जयपुर। राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनाव को लेकर हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार को 31 जुलाई 2026 तक चुनाव कराने के निर्देश दिए हैं। हाईकोर्ट ने दिसंबर तक चुनाव टालने की मांग पर आज यह अहम फैसला सुनाया है। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आरक्षण निर्धारण के लिए गठित आयोग को 20 जून तक अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

मामले की सुनवाई कर रही हाईकोर्ट की कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एसपी शर्मा की खंडपीठ ने यह आदेश जारी किया। अदालत ने इस प्रकरण में सुनवाई पूरी होने के बाद 11 मई को फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे अब सुनाया गया है।

हाईकोर्ट के आदेश के बाद राज्य सरकार पर निर्धारित समय में पंचायत और स्थानीय निकाय चुनाव कराने का दबाव बढ़ गया है। अब सरकार को 31 जुलाई तक चुनावी प्रक्रिया पूरी करनी होगी। हाईकोर्ट के इस फैसले कांग्रेस खेमे में उत्साह की लहर है।

गौरतलब है कि इससे पहले 14 नवंबर 2025 को हाईकोर्ट ने विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को 15 अप्रैल 2026 तक पंचायत और निकाय चुनाव कराने के निर्देश दिए थे। हालांकि सरकार तय समय में चुनाव नहीं करा सकी और अतिरिक्त समय की मांग को लेकर अदालत में प्रार्थना पत्र दायर किया था।

सरकार ने ओबीसी आरक्षण का हवाला देकर मांगा था समय:-

राज्य सरकार ने अदालत में दायर आवेदन में तर्क दिया था कि पंचायत और निकाय चुनावों में OBC आरक्षण तय करने के लिए गठित आयोग की रिपोर्ट अभी लंबित है, ऐसे में चुनाव कराना व्यावहारिक नहीं होगा। राज्य चुनाव आयोग ने भी हाईकोर्ट में सरकार के चुनाव टालने का समर्थन किया था।

उसके बाद सरकार ने बीते दिनों ही रिपोर्ट नहीं आने का हवाला देते हुए ओबीसी आयोग का कार्यकाल तीसरी बार बढ़ाया था। इस पर पूर्व विधायक संयम लोढ़ा और गिर्राज सिंह देवंदा सहित कई पक्षों ने सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर चुनाव टाल रही है।

सरकार के पास अभी भी विकल्प खुले हैं:-

हाईकोर्ट के फैसले के बाद भी राज्य सरकार के पास कानूनी विकल्प मौजूद हैं। सरकार चाहे तो इस आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख कर सकती है। कांग्रेस लगातार इस मुद्दे पर राज्य सरकार को घेरती रही है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार राजनीतिक कारणों से पंचायत और निकाय चुनावों को टालने की कोशिश कर रही थी। फिलहाल हाईकोर्ट के आदेश के बाद चुनाव की समयसीमा स्पष्ट हो गई है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि सरकार अदालत के निर्देशों का पालन करती है या उच्चतम न्यायालय में चुनौती देती है।