ईरान-अमेरिका सैन्य संघर्ष का भारत पर दोहरा असर: महंगाई के साथ खाड़ी देशों में भारतीयों की नौकरियों पर मंडराया संकट

नई दिल्ली | Rkhabar.com
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसकी गूंज भारत की अर्थव्यवस्था और लाखों प्रवासी भारतीयों के जीवन पर भी साफ दिखाई देने लगी है। खाड़ी देशों में काम करने वाले भारतीयों की नौकरियों पर संकट गहराने लगा है, वहीं कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के कारण भारत में महंगाई बढ़ने की आशंका भी तेज हो गई है।
भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में मध्य-पूर्व में अस्थिरता बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें ऊपर जा रही हैं। इसका सीधा असर पेट्रोल-डीजल, परिवहन, खाद्य पदार्थों और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर पड़ सकता है।
खाड़ी देशों में भारतीयों की नौकरियां खतरे में
संघर्ष का सबसे बड़ा असर संयुक्त अरब अमीरात (UAE) सहित खाड़ी देशों में काम कर रहे लाखों प्रवासी भारतीयों पर पड़ रहा है। दुबई और अन्य शहरों में पर्यटन, विमानन, होटल, कैटरिंग और सेवा क्षेत्र की गतिविधियां धीमी होने से कई कंपनियों ने कर्मचारियों की छंटनी शुरू कर दी है। नई भर्तियों पर भी रोक लगाई जा रही है।
दुबई में कार्यरत कई भारतीयों का कहना है कि युद्ध के कारण कारोबार प्रभावित हुआ है, जिससे वेतन में कटौती और रोजगार समाप्त होने जैसी स्थितियां सामने आ रही हैं। कई श्रमिकों को मजबूरी में भारत लौटना पड़ा है, जबकि हजारों लोग अब भी अनिश्चितता के बीच नौकरी बचाने की कोशिश कर रहे हैं।
घरेलू कामगारों पर भी संकट
घरेलू कामकाज करने वाली महिलाओं के लिए भी रोजगार के अवसर तेजी से कम हुए हैं। कई प्रवासी महिलाओं को लंबे समय से नया काम नहीं मिल पा रहा है। परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी उठाने वाले इन श्रमिकों के सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
कैटरिंग, होटल और एविएशन सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित
कैटरिंग कंपनियों, होटल उद्योग और विमानन क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों को सबसे अधिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। कई कंपनियों का नकदी प्रवाह प्रभावित होने से कर्मचारियों के वेतन और सप्लायरों के भुगतान में भी दिक्कतें आ रही हैं। कुछ कंपनियों ने संचालन सीमित कर दिया है, जबकि कई ने नई नियुक्तियां पूरी तरह रोक दी हैं।
सर्वे में सामने आई चिंताजनक तस्वीर
मैनपावरग्रुप द्वारा संयुक्त अरब अमीरात के 546 नियोक्ताओं पर किए गए सर्वेक्षण के अनुसार, वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में प्रत्येक चार में से एक नियोक्ता कर्मचारियों की संख्या घटाने की योजना बना रहा है। वहीं लगभग एक-तिहाई कंपनियों ने फिलहाल नई भर्तियां नहीं करने का फैसला किया है। इससे आने वाले महीनों में रोजगार बाजार पर और दबाव बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
भारत पर आर्थिक असर भी संभव
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष लंबा खिंचता है तो भारत को दोहरी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। एक ओर महंगे कच्चे तेल के कारण आयात बिल और महंगाई बढ़ेगी, वहीं दूसरी ओर खाड़ी देशों से आने वाले विदेशी मुद्रा प्रेषण (रेमिटेंस) में कमी आने का खतरा भी रहेगा। भारत को हर वर्ष अरबों डॉलर का रेमिटेंस खाड़ी देशों में कार्यरत भारतीयों से प्राप्त होता है, जो देश की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण स्रोत है।
UAE सरकार ने उठाए राहत कदम
आर्थिक गतिविधियों को सहारा देने के लिए UAE सरकार ने 680 मिलियन डॉलर से अधिक के राहत पैकेज की घोषणा की है। वहां के अर्थव्यवस्था एवं पर्यटन मंत्री अब्दुल्ला बिन तौक अल-मरी ने हालात को अस्थायी बताते हुए विश्वास जताया है कि परिस्थितियां जल्द सामान्य होंगी। वहीं दुबई इन्वेस्टमेंट्स के अधिकारियों ने भी कारोबार में धीरे-धीरे सुधार की उम्मीद जताई है।
अनिश्चितता बनी हुई
हालांकि कुछ समय के लिए युद्धविराम जैसी स्थिति बनने से राहत की उम्मीद जगी थी, लेकिन अमेरिका और ईरान के बीच फिर बढ़े सैन्य हमलों ने एक बार फिर अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया है। इसका सीधा असर खाड़ी देशों की अर्थव्यवस्था, वहां के रोजगार बाजार और लाखों भारतीय परिवारों की आय पर पड़ रहा है।
यदि पश्चिम एशिया में तनाव जल्द कम नहीं हुआ तो भारत के लिए महंगाई, ऊर्जा सुरक्षा और प्रवासी भारतीयों के रोजगार—तीनों मोर्चों पर चुनौतियां और बढ़ सकती हैं।