Cyber Fraud: साइबर ठगों का नया खेल, डिजिटल अरेस्ट और ऑनलाइन जॉब के नाम पर दो लोगों से 16 लाख की ठगी
जयपुर: राजधानी में साइबर ठग लगातार नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं। हाल ही में वैशाली नगर और करणी विहार थाना क्षेत्रों में दो अलग-अलग मामलों में जालसाजों ने करीब 16 लाख रुपये की ठगी कर ली। पुलिस ने दोनों प्रकरणों में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
वैशाली नगर निवासी मुकुल अग्रवाल को ठगों ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ का डर दिखाकर जाल में फंसाया। आरोपियों ने खुद को सरकारी एजेंसी से जुड़ा बताते हुए फर्जी डिजिटल नोटिस और दस्तावेज भेजे, जो बिल्कुल असली प्रतीत हो रहे थे। इन दस्तावेजों के जरिए मुकुल को डराया गया कि वे किसी गंभीर कानूनी पचड़े में फंस सकते हैं। भयभीत होकर मुकुल ने आरोपियों के निर्देश पर अलग-अलग ट्रांजेक्शन के जरिए कुल 6,56,300 रुपये ट्रांसफर कर दिए। पैसे मिलते ही ठगों ने संपर्क तोड़ लिया।
वहीं करणी विहार थाना क्षेत्र के पांच्यावाला निवासी विधेश खन्ना को ‘वर्क फ्रॉम होम’ और ऑनलाइन टास्क के जरिए कमाई का लालच दिया गया। शुरुआत में ठगों ने छोटे टास्क देकर कुछ रकम लौटाई, जिससे भरोसा कायम हो गया। बाद में ‘प्रीमियम टास्क’ और ‘सिक्योरिटी फीस’ के नाम पर मोटी रकम जमा करवाई गई। बेहतर मुनाफे की उम्मीद में विधेश ने 9,43,728 रुपये गंवा दिए।
दोनों पीड़ितों ने तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ट्रांजेक्शन से जुड़े बैंक खातों की जांच कर रही है और मोबाइल नंबरों व अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर गिरोह तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।
पुलिस और साइबर विशेषज्ञों ने आमजन से अपील की है कि किसी भी फोन कॉल या मैसेज के जरिए मिलने वाले कानूनी डर या ऑनलाइन कमाई के लालच में न आएं। कोई भी सरकारी एजेंसी फोन पर पैसे की मांग या ‘डिजिटल अरेस्ट’ नहीं करती। अनजान खातों में रकम भेजने से पहले पूरी तरह पुष्टि करना बेहद जरूरी है।