शेयर बाजार में हाहाकार: निवेशकों को 1 ही दिन में 6 लाख करोड़ का नुकसान, सेंसेक्स 900 अंक टूटा

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भारतीय शेयर बाजार आज मंगलवार को भारी गिरावट के साथ बंद हुआ। बीएसई सेंसेक्स 1.16 फीसदी यानी 893 अंक गिरकर 76,200 पर बंद हुआ। बाजार बंद होते समय सेंसेक्स पैक के 30 शेयरों में से 28 शेयर लाल निशान पर और केवल 2 शेयर हरे निशान पर रहे। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 1.16 फीसदी यानी 278 अंक टूटकर 23,824 पर बंद हुआ। निफ्टी बैंक 1.30 फीसदी और निफ्टी आईटी इंडेक्स 2.23 फीसदी की गिरावट के साथ बंद हुए। बाजार में आई इस गिरावट से निवेशकों को एक ही दिन में करीब 6 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

मेटल और आईटी शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट:-

सेक्टोरल सूचकांकों में सबसे बड़ी गिरावट निफ्टी मेटल में 3.22 फीसदी दर्ज की गई। वहीं, निफ्टी आईटी इंडेक्स 2.23 फीसदी गिरकर बंद हुई। इसके अलावा, निफ्टी मीडिया में 1.47 फीसदी, निफ्टी ऑटो में 0.77 फीसदी, निफ्टी पीएसयू बैंक में 1.97 फीसदी, निफ्टी प्राइवेट बैंक में 0.77 फीसदी, निफ्टी रियल्टी में 1.12 फीसदी, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में 1.50 फीसदी और निफ्टी ऑयल एंड गैस में 0.90 फीसदी की गिरावट दर्ज हुई।

क्यों गिरा शेयर बाजार?

कोरिया बाजार में बड़ी गिरावट का असर:-

साउथ कोरिया के शेयर बाजार में ऑल टाइम हाई लेवल से जबरदस्त गिरावट आई है। एआई कंपनियों में भारी बिकवाली के चलते साउथ कोरिया का प्रमुख इंडेक्स कॉस्पी 9.99 फीसदी टूट गया, जो तीन महीने से अधिक समय की सबसे तेज गिरावट बताई जा रही है। SK Hynix के शेयर 11 फीसदी और Samsung Electronics के शेयर 8 फीसदी तक गिर गए। हालात ऐसे रहे कि कोरिया एक्सचेंज को 20 मिनट के लिए ट्रेडिंग रोकनी पड़ी। इसका असर भारतीय आईटी शेयरों पर भी देखने को मिला।

आईटी शेयरों में फिर बढ़ी बिकवाली:-

सोमवार की तेजी के बाद मंगलवार को आईटी शेयरों में फिर से बिकवाली शुरू हो गई है। टीसीएस, इन्फोसिस, विप्रो और एचसीएल टेक के शेयर 3 फीसदी से अधिक टूट गए। एआई सेक्टर को लेकर बढ़ती चिंताओं और कंपनियों द्वारा टेक्नोलॉजी खर्च में कटौती की आशंकाओं के कारण निवेशकों ने बिकवाली की।

यूएस फेड रेट बढ़ने की आशंका:-

मिडिल ईस्ट में तनाव कम होने के बावजूद अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की आशंका बनी हुई है। ईरान-अमेरिका शांति वार्ता को लेकर अनिश्चितता भी बाजार की चिंता बढ़ा रही है। CME FedWatch Tool के अनुसार, ट्रेडर्स दिसंबर में फेडरल रिजर्व द्वारा रेट हाइक की 88 फीसदी संभावना जता रहे हैं, जो पिछले सप्ताह फेड बैठक के समय 61 फीसदी थी। इससे निवेशकों का सेंटीमेंट कमजोर हुआ है।

रुपये में भी कमजोरी:-

भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 0.16 फीसदी कमजोर होकर 94.82 के स्तर पर पहुंच गया। फेड रेट बढ़ने की आशंकाओं के चलते रुपये पर दबाव बना हुआ है और निवेशक लॉन्ग टर्म निवेश को लेकर सतर्क नजर आ रहे हैं।