ईरान युद्ध के बीच देशभर में गैस सिलेंडर की किल्लत, रेस्तरां से लेकर ये चीजे हुई प्रभावित

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देशभर में कमर्शियल LPG सिलेंडर की सप्लाई में अचानक आई कमी ने होटल और रेस्टोरेंट कारोबार के सामने नई परेशानी खड़ी कर दी है। सरकार फिलहाल घरेलू गैस उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दे रही है, जिसके चलते कई शहरों में व्यावसायिक सिलेंडरों की डिलीवरी प्रभावित हो रही है। रेस्टोरेंट संचालकों का कहना है कि गैस की कमी के कारण उन्हें मेनू सीमित करना पड़ रहा है और कुछ जगहों पर अस्थायी रूप से संचालन बंद करने की नौबत भी आ सकती है। इस सप्लाई में आई रुकावट के पीछे इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के असर को भी एक कारण माना जा रहा है।

रेस्टोरेंट और होटल कारोबार पर असर:-

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार मुंबई, बेंगलुरु और गुरुग्राम जैसे बड़े शहरों में होटल व रेस्टोरेंट मालिकों को कमर्शियल LPG की कमी का सामना करना पड़ रहा है। उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि घरेलू गैस की सप्लाई को प्राथमिकता दिए जाने से कमर्शियल सिलेंडरों की उपलब्धता कम हो गई है। हालांकि पेट्रोलियम मंत्रालय और तेल कंपनियों का कहना है कि देश में गैस का स्टॉक पर्याप्त है और घबराने की कोई जरूरत नहीं है। स्थिति को सामान्य बनाए रखने के लिए LPG उत्पादन लगभग 10 प्रतिशत तक बढ़ाने के निर्देश भी दिए गए हैं।

कई रेस्टोरेंट ने अपनाया ‘क्राइसिस मेनू’

गैस की बचत के लिए कई रेस्टोरेंट अब “क्राइसिस मेनू” लागू करने लगे हैं। इसमें ऐसे व्यंजन शामिल किए जा रहे हैं जिन्हें कम समय और कम गैस में तैयार किया जा सके। इसके अलावा कई जगहों पर कोयला आधारित तंदूर का उपयोग बढ़ाया जा रहा है ताकि गैस पर निर्भरता कम की जा सके।

बेंगलुरु में डोसा पर पड़ा ज्यादा असर:-

गैस संकट का सबसे अधिक असर उन रेस्टोरेंट पर पड़ रहा है जहां लगातार तेज आंच की जरूरत होती है। बेंगलुरु के कई लोकप्रिय भोजनालयों में डोसा जैसे व्यंजन बड़ी मात्रा में बनाए जाते हैं, जिनके लिए लगातार गैस बर्नर जलाना पड़ता है। कुछ रेस्टोरेंट रोजाना 6 से 12 तक LPG सिलेंडर का उपयोग करते हैं, लेकिन कई जगह सामान्य सप्लाई का केवल 20 प्रतिशत ही सिलेंडर मिल पा रहा है। इससे रसोई संचालन प्रभावित हो रहा है। कई रेस्टोरेंट ने तवे की संख्या कम कर दी है ताकि गैस की खपत घटाई जा सके। कुछ जगहों पर इंडक्शन और इलेक्ट्रिक कुकिंग उपकरणों का सहारा लिया जा रहा है, हालांकि संचालकों का कहना है कि इनसे पारंपरिक तेज आंच जैसा परिणाम नहीं मिल पाता।

मेनू में कटौती और ब्लैक मार्केट की समस्या:-

गैस की कमी के चलते कई रेस्टोरेंट मालिकों ने अपने मेनू में कटौती कर दी है। ऐसे व्यंजन हटाए जा रहे हैं जिन्हें पकाने में ज्यादा गैस लगती है। उद्योग संगठनों ने भी अपने सदस्यों को गैस की बचत के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिनमें सीमित मेनू रखना, कम गैस में बनने वाले व्यंजनों को प्राथमिकता देना और संचालन समय कम करना शामिल है।

दूसरी ओर, कमर्शियल सिलेंडरों की कमी ने ब्लैक मार्केट को भी बढ़ावा दिया है। जहां आधिकारिक कीमत करीब 1940 रुपये है, वहीं कुछ जगहों पर एक सिलेंडर 2800 से 3000 रुपये तक में बेचा जा रहा है। ऐसे में छोटे रेस्टोरेंट और ढाबा संचालकों के लिए स्थिति और ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो गई है।