पूगल के कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय का हुआ कायाकल्प, छात्राओं को मिली आधुनिक सुविधाएं

पूगल क्षेत्र स्थित कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (KGBV) स्कूल एवं छात्रावास का व्यापक पुनर्विकास कार्य अप्रावा एनर्जी के वित्तीय सहयोग और उरमूल ट्रस्ट के संयुक्त प्रयासों से सफलतापूर्वक पूर्ण किया गया। इस अवसर पर एक विशेष कार्यक्रम आयोजित कर किए गए विकास कार्यों का अवलोकन किया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत उरमूल ट्रस्ट के सचिव रमेश सारण और परियोजना प्रबंधक रेवंत राम के दौरे से हुई। उन्होंने छात्रावास और विद्यालय परिसर का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने सहायक वार्डन अमीना, विद्यालय की प्रधानाध्यापिका सुमन गोदारा, राजकीय विद्यालय पुगल के कार्यवाहक प्राचार्य अजमल राम और मनोज से मुलाकात की। छात्राओं ने अतिथियों का पारंपरिक टीका एवं स्वागत कर सम्मान किया।

निरीक्षण के दौरान छात्रावास में कराए गए मरम्मत एवं रंग-रोगन कार्यों का अवलोकन किया गया। डॉरमेट्री में डेजर्ट कूलर, पंखे, अलमारियां, 20 सन्दूक, 5 KWH सोलर सिस्टम, 50 LPH RO सिस्टम तथा खेल सामग्री जैसे वॉलीबॉल, फुटबॉल, बैडमिंटन, कैरम और शतरंज की व्यवस्था देखी गई। इन सुविधाओं से छात्राओं के रहने और मनोरंजन के वातावरण में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
इसके बाद अतिथियों ने विद्यालय का भ्रमण कर शिक्षकों से संवाद किया और डिजिटल लाइब्रेरी का अवलोकन किया। इस लाइब्रेरी में 10 लेनोवो टैबलेट उपलब्ध कराए गए हैं, जिनके माध्यम से छात्राएं वीडियो, डिजिटल पुस्तकों, सामान्य ज्ञान और करंट अफेयर्स का अध्ययन कर रही हैं।
विद्यालय में बैठने के लिए 15 डेस्क, 20 बेड, डेजर्ट कूलर, अलमारियां, खेल सामग्री तथा शिक्षकों के लिए 6 टेबल और 6 कुर्सियों की व्यवस्था भी की गई है।
कार्यक्रम के दौरान अतिथियों का साफा पहनाकर स्वागत किया गया। कक्षा 8 की छात्रा कविता ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया, जबकि छात्रा जयश्री ने अपने अनुभव साझा करते हुए परियोजना से हुए लाभों की जानकारी दी।
अतिथियों ने अपने संबोधन में डिजिटल शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए छात्राओं को उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम उपयोग करने के लिए प्रेरित किया। इस दौरान अप्रावा एनर्जी के सीएसआर और उरमूल ट्रस्ट द्वारा सभी सामग्री विद्यालय की प्रधानाध्यापिका और वार्डन को सुपुर्द की गई।
प्रधानाध्यापिका सुमन गोदारा ने सभी अतिथियों एवं सहयोगी संस्थाओं का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन मुकेश राजपुरोहित ने किया, जबकि संतोष, जशोदा, इन्द्र कुमार और ओम प्रकाश ने सक्रिय भूमिका निभाई।
यह पुनर्विकास परियोजना बालिकाओं के समग्र विकास, डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने और उनके उज्ज्वल भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।