Rajasthan Panchayat-Nikay Election: राजस्थान में पंचायत-निकाय चुनाव फिर टले, पढ़े खबर

Rajasthan Panchayat-Nikay Election: राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी लगातार बढ़ती जा रही है। इसी बीच राज्य सरकार ने मंगलवार को ओबीसी आयोग का कार्यकाल एक बार फिर 6 महीने बढ़ाकर 30 सितंबर 2026 तक कर दिया है। इस फैसले के बाद यह लगभग तय माना जा रहा है कि पंचायत और नगर निकाय चुनाव अब सितंबर के बाद ही कराए जाएंगे।
ओबीसी आरक्षण तय करने के लिए गठित आयोग अभी तक अपनी अंतिम रिपोर्ट सरकार को नहीं सौंप पाया है। ऐसे में जब तक सर्वे रिपोर्ट नहीं आती, चुनाव की स्थिति स्पष्ट होना मुश्किल है।
डेटा की कमी, सर्वे ही सहारा:-
सूत्रों के अनुसार, आयोग को 400 से अधिक ग्राम पंचायतों का जरूरी डेटा नहीं मिल पाया है। इसको लेकर पंचायत राज विभाग से जानकारी मांगी गई थी। इसको लेकर विभाग ने आयोग को भेजे गए पत्र में स्पष्ट किया है कि संबंधित डेटा पहले ही आयोजना विभाग से लिया गया था और वही विभाग इस जानकारी के लिए जिम्मेदार है। पंचायत राज विभाग के पास अलग से यह डेटा उपलब्ध नहीं है। अब ऐसे में आयोग के पास सर्वे पूरा करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।
हाईकोर्ट की सख्ती जारी:-
Rajasthan High Court पहले भी चुनाव में देरी को लेकर कई बार नाराजगी जता चुका है—
- 18 अगस्त 2025: अदालत ने कहा कि समय पर चुनाव कराना निर्वाचन आयोग की जिम्मेदारी है।
- 20 सितंबर 2025: शहरी निकाय चुनाव में देरी पर भी सख्त निर्देश दिए गए।
- 14 नवंबर 2025: खंडपीठ ने 31 दिसंबर 2025 तक परिसीमन और 15 अप्रैल 2026 तक चुनाव कराने के आदेश दिए, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा।
- 24 मार्च 2026: अवमानना याचिका पर सुनवाई के लिए 2 अप्रैल की तारीख तय की गई है।
5 साल में चुनाव जरूरी:-
पूर्व निर्वाचन आयुक्त मधुकर गुप्ता का कहना है कि अदालतों के फैसले साफ हैं—चुनाव पांच साल के भीतर कराना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में चुनाव कराए जा सकते हैं, जबकि बदलाव अगली प्रक्रिया में किए जा सकते हैं।
जनप्रतिनिधि नहीं, प्रशासन चला रहा निकाय:-
चुनाव में देरी के चलते कई पंचायतों और शहरी निकायों में प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है। जनप्रतिनिधियों के अभाव में निकायों की जिम्मेदारी अधिकारियों को प्रशासक के रूप में दी गई है। इससे स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों और वित्तीय फैसलों में जनभागीदारी नहीं हो पा रही है।