फर्जी IAS बनकर गांव में मनाया जश्न, 899वीं रैंक का दावा निकला झूठा, एडमिट कार्ड से खुली पोल
फर्जी IAS बनकर गांव में मनाया जश्न, 899वीं रैंक का दावा निकला झूठा, एडमिट कार्ड से खुली पोल
Alwar News: बानसूर क्षेत्र में एक युवक द्वारा खुद को UPSC में चयनित बताकर जश्न मनाने का मामला अब सुर्खियों में है। Union Public Service Commission की परीक्षा में सफलता का दावा करने वाले नांगल भाव सिंह गांव निवासी निशांत कुमार की सच्चाई सामने आने के बाद पूरे इलाके में चर्चा तेज हो गई है।
बताया जा रहा है कि निशांत ने दावा किया था कि उसने सिविल सेवा परीक्षा में 899वीं रैंक हासिल की है। इस खबर के बाद गांव में खुशी का माहौल बन गया। ग्रामीणों ने उसे कंधों पर बैठाकर जुलूस निकाला और ढोल-नगाड़ों के साथ जश्न मनाया। पूर्व कैबिनेट मंत्री शकुन्तला रावत समेत कई जनप्रतिनिधि उसे बधाई देने उसके घर जा पहुंचे। सार्वजनिक मंच से निशांत ने अपनी ‘फर्जी’ संघर्ष की कहानी सुनाकर सबको भावविभोर कर डाला।
एडमिट कार्ड से खुला राज:-
निशांत ने कथित तौर पर एडमिट कार्ड में छेड़छाड़ कर खुद को सफल अभ्यर्थी साबित करने की कोशिश की। उसने समान नाम का फायदा उठाकर आगरा के असली उम्मीदवार की 899वीं रैंक को अपना बताया। लेकिन मामला तब खुला जब किसी ने एडमिट कार्ड पर लगे QR कोड को स्कैन किया। स्कैन करते ही सामने आई जानकारी ने उसके दावे को झूठा साबित कर दिया।
सिर्फ प्रारंभिक परीक्षा तक सीमित रहा:-
जांच में सामने आया कि जिस रोल नंबर का वह दावा कर रहा था, वह किसी अन्य उम्मीदवार का था। UPSC की आधिकारिक चयन सूची में निशांत का नाम नहीं मिला। यह भी पता चला कि उसने केवल प्रारंभिक परीक्षा दी थी और मुख्य परीक्षा तक भी नहीं पहुंच सका था। अब इस मामले के बाद सिस्टम पर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं। फिलहाल दस्तावेजों में छेड़छाड़ और धोखाधड़ी के आरोपों को देखते हुए आरोपी के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।
सम्मान समारोह में सुनाई थी ‘सफलता’ की कहानी
गांव में हुए सम्मान समारोह के दौरान निशांत ने अपनी कथित सफलता का श्रेय परिवार, दोस्तों और गांववालों को दिया था। उसने बताया था कि उसने तैयारी यूट्यूब जैसे ऑनलाइन माध्यमों से की और करंट अफेयर्स व इंटरव्यू की तैयारी एक कोचिंग सेंटर से ली। हालांकि अब उसकी पूरी कहानी झूठी साबित हो चुकी है।