राजस्थान में 2.80 करोड़ की साइबर ठगी का बड़ा खुलासा, सिलीगुड़ी से मास्टरमाइंड गिरफ्तार; विदेशों तक फैले नेटवर्क के तार

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राजसमंद। Rkhabar

राजस्थान के राजसमंद जिले में सामने आए करीब 2 करोड़ 80 लाख 40 हजार रुपए की साइबर ठगी के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। राजसमंद साइबर पुलिस ने करीब 17 दिनों तक कई राज्यों में लगातार दबिश और तकनीकी जांच के बाद साइबर ठगी के नेटवर्क से जुड़े प्रमुख आरोपी दीपू उर्फ डेण्डी उर्फ छोटू मंडल को पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी से गिरफ्तार किया है। वहीं, आमेट थाना पुलिस ने भी साइबर ठगी के एक मामले में बबलू सिंह को गिरफ्तार किया है।

पुलिस की जांच में इस पूरे नेटवर्क के तार नेपाल, चीन, श्रीलंका और कंबोडिया तक जुड़े होने की बात सामने आई है। पुलिस के अनुसार, गिरोह के सदस्य भारत में अलग-अलग लोगों के बैंक खाते, सिम कार्ड और मोबाइल फोन जुटाकर उनका इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम को इधर-उधर ट्रांसफर करने में करते थे।

17 दिनों तक 8 राज्यों में पुलिस की तलाश

साइबर ठगी के मामले की गंभीरता को देखते हुए राजसमंद पुलिस ने विशेष टीम गठित की। टीम ने करीब 17 दिनों तक बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, जामताड़ा, सिलीगुड़ी, दार्जिलिंग और असम के गुवाहाटी सहित कई स्थानों पर जांच और तलाश की।

तकनीकी जानकारी और पैसों के लेन-देन की कड़ियों को जोड़ते हुए पुलिस आखिरकार सिलीगुड़ी तक पहुंची। यहां देवीडंगा बाबूबासा, चम्पासरी क्षेत्र से दीपू मंडल को गिरफ्तार किया गया। आरोपी को ट्रांजिट रिमांड पर लेकर राजसमंद लाया गया और मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया।

पुलिस ने आरोपी के कब्जे से:

  • 44 सिम कार्ड
  • 5 डेबिट कार्ड
  • 4 मोबाइल फोन

बरामद किए हैं। पुलिस इन उपकरणों और सिम कार्ड की मदद से गिरोह के अन्य सदस्यों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।

चीन और नेपाल से जुड़े नेटवर्क का खुलासा

पुलिस पूछताछ में आरोपी दीपू मंडल ने कथित तौर पर बताया कि वह काठमांडू निवासी आन छिरिंग शेरपा और चीन निवासी रूआन उर्फ राम के लिए काम करता था। पुलिस के अनुसार रूआन उर्फ राम विदेश से संचालित साइबर ठगी के नेटवर्क को भारत में संचालित करने के लिए लोगों की मदद लेता था।

आरोपी का काम अलग-अलग राज्यों से ऐसे मोबाइल फोन, सिम कार्ड और बैंक खाते जुटाना था, जिनका इस्तेमाल साइबर अपराध में किया जा सके। इन खातों के माध्यम से ठगी की रकम को एक खाते से दूसरे खाते में भेजा जाता था, ताकि रकम के वास्तविक स्रोत का पता लगाना मुश्किल हो जाए।

फर्जी ऐप और बैंक खातों के जरिए रकम ट्रांसफर

जांच में सामने आया कि साइबर ठगी की रकम को ट्रांसफर करने के लिए विदेश में बैठे गिरोह के संचालकों द्वारा कुछ ऐप्लीकेशन मोबाइल में इंस्टॉल करवाए जाते थे। इसके बाद बैंक खातों से संबंधित जानकारी गिरोह के सदस्यों तक पहुंचाई जाती थी।

पुलिस के अनुसार, ठगी की रकम के सेटलमेंट के बदले आरोपियों को कमीशन मिलता था। यह कमीशन यूएसडीटी जैसी क्रिप्टोकरेंसी के रूप में दिए जाने की बात भी जांच में सामने आई है।

पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क में और कितने लोग शामिल हैं और भारत के किन-किन राज्यों में इस गिरोह का नेटवर्क फैला हुआ है।

कंबोडिया, म्यांमार और थाईलैंड से चल रहे थे कॉल सेंटर

पुलिस की जांच में साइबर ठगी के इस नेटवर्क का एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन भी सामने आया है। पुलिस के अनुसार गिरोह के संचालक कंबोडिया, म्यांमार और थाईलैंड में कॉल सेंटर संचालित करते हैं।

गिरोह के सदस्य सोशल मीडिया और डेटिंग वेबसाइट्स पर फर्जी प्रोफाइल बनाकर लोगों से संपर्क करते थे। बातचीत के दौरान लोगों को ऑनलाइन निवेश से संबंधित आकर्षक योजनाओं के बारे में बताया जाता था।

शुरुआत में कम रकम निवेश करवाने के बाद आरोपी अलग-अलग बहानों से पीड़ित को लगातार और ज्यादा पैसा लगाने के लिए तैयार करते थे। जब व्यक्ति बड़ी रकम निवेश कर देता था तो उसके बाद रकम निकालने, टैक्स, प्रोसेसिंग फीस या अन्य कारण बताकर उससे और पैसे मांगे जाते थे।

इस तरह पीड़ित के साथ लगातार साइबर ठगी की जाती थी।

ठगी की रकम को म्यूल खातों से घुमाने का तरीका

पुलिस के अनुसार, साइबर अपराधी ठगी की रकम को सीधे अपने खाते में रखने के बजाय दूसरे लोगों के बैंक खातों का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे खातों को जांच एजेंसियों द्वारा सामान्य तौर पर म्यूल बैंक अकाउंट कहा जाता है।

ठगी की रकम इन खातों में आने के बाद उसे कई अलग-अलग खातों में ट्रांसफर किया जाता है। इसके बाद रकम को फर्जी गेमिंग या बैटिंग प्लेटफॉर्म और क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से आगे भेजने की कोशिश की जाती है।

इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य पैसों की वास्तविक कड़ी को छिपाना और जांच एजेंसियों के लिए रकम का स्रोत पता करना मुश्किल बनाना होता है।

बैटिंग और गेमिंग प्लेटफॉर्म से भी जुड़ी रकम

पुलिस के अनुसार, साइबर अपराधी ठगी की रकम को कुछ ऑनलाइन गेमिंग और बैटिंग प्लेटफॉर्म के जरिए भी अलग-अलग बैंक खातों में भेजते हैं। कई बार खाते के वास्तविक धारक को यह जानकारी नहीं होती कि उसके खाते में आई रकम का संबंध साइबर अपराध से है।

ऐसे मामलों में बैंक खाते पर साइबर शिकायत दर्ज होने के बाद खाते को फ्रीज किया जा सकता है। इससे खाताधारक भी परेशानी में पड़ सकता है और उसे जांच का सामना करना पड़ सकता है।

पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे किसी अनजान व्यक्ति को अपना बैंक खाता, सिम कार्ड, मोबाइल या बैंकिंग संबंधी जानकारी इस्तेमाल के लिए उपलब्ध न करवाएं।

आमेट से बबलू सिंह भी गिरफ्तार

इसी अभियान के तहत आमेट थाना पुलिस ने साइबर ठगी के एक अन्य मामले में बबलू सिंह को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार उसके बैंक खाते में साइबर ठगी से जुड़ी रकम आने की जानकारी सामने आई थी।

पुलिस मुख्यालय से प्राप्त जानकारी और बैंक रिकॉर्ड की जांच के दौरान संबंधित खाता बबलू सिंह के नाम पर पाया गया। खाते के संबंध में साइबर शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने जांच आगे बढ़ाई और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।

कंबोडिया में साइबर ठगी से जुड़ने का आरोप

पुलिस पूछताछ में कथित तौर पर सामने आया कि बबलू सिंह पहले कंबोडिया में साइबर ठगी से जुड़े लोगों के संपर्क में था। वहां जिस कंपनी में वह काम करता था, उस पर कार्रवाई के बाद कंपनी बंद हो गई और वह भारत लौट आया।

पुलिस के अनुसार भारत आने के बाद भी उसका साइबर ठगी से जुड़े लोगों से संपर्क बना रहा। आरोप है कि साइबर ठगी से प्राप्त रकम उसके बैंक खाते में आती थी और गिरोह के निर्देश पर उसे आगे भेजा जाता था।

पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि उसके बैंक खाते में कितनी रकम आई और इस नेटवर्क में उसके साथ कौन-कौन लोग जुड़े हुए थे।

पंजाब, गुजरात, तेलंगाना और बिहार तक नेटवर्क की जांच

राजसमंद पुलिस के अनुसार, इस नेटवर्क के भारत में कई राज्यों तक फैले होने की आशंका है। पुलिस को पंजाब, गुजरात, तेलंगाना और बिहार सहित अन्य राज्यों में भी ऐसे लोगों के सक्रिय होने की जानकारी मिली है, जो कथित तौर पर मुख्य आरोपी रूआन उर्फ राम के लिए काम कर रहे थे।

इन संदिग्धों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए पुलिस की कार्रवाई जारी है।

पुलिस की आमजन से अपील—बैंक खाता और सिम किसी को न दें

पुलिस ने आमजन को साइबर अपराध से बचने के लिए विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। पुलिस का कहना है कि सोशल मीडिया या डेटिंग प्लेटफॉर्म पर अनजान लोगों से बातचीत करते समय विशेष सावधानी बरतें।

किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर ऑनलाइन निवेश न करें और ऐसे प्लेटफॉर्म पर पैसे न लगाएं, जिनकी विश्वसनीयता की पुष्टि नहीं हुई है।

साथ ही किसी व्यक्ति को अपना बैंक खाता, एटीएम/डेबिट कार्ड, सिम कार्ड, मोबाइल फोन, ईमेल या बैंकिंग जानकारी इस्तेमाल करने के लिए न दें।

पुलिस ने यह भी चेताया है कि किसी अन्य व्यक्ति के कहने पर अपने बैंक खाते में रकम लेना और फिर उसे आगे ट्रांसफर करना भी गंभीर परेशानी खड़ी कर सकता है। यदि वह रकम साइबर अपराध से जुड़ी पाई जाती है तो खाताधारक का बैंक खाता फ्रीज हो सकता है और उसे कानूनी जांच का सामना करना पड़ सकता है।

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