Inside Story: धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के पीछे क्या रही वजह? युवाओं की नाराज़गी से चुनावी गणित तक

नई दिल्ली | Rkhabar
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद जंतर-मंतर पर चल रहा छात्र आंदोलन समाप्त हो गया है। इस्तीफा देने के साथ ही सरकार ने आंदोलन से जुड़ी अन्य प्रमुख मांगों पर भी सकारात्मक रुख अपनाया है। राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में अब इस बात पर चर्चा है कि आखिर सरकार ने अंतिम समय में यह बड़ा फैसला क्यों लिया।
सूत्रों और विभिन्न मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सरकार के इस निर्णय के पीछे कई कारण रहे। इनमें युवाओं की बढ़ती नाराज़गी, विपक्ष का लगातार दबाव, सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट और आगामी विधानसभा चुनावों का राजनीतिक समीकरण प्रमुख बताए जा रहे हैं।
युवाओं की नाराज़गी बनी बड़ी चिंता
रिपोर्ट्स के मुताबिक सरकार को सबसे अधिक चिंता देश के युवाओं, खासकर Gen Z वर्ग में बढ़ते असंतोष की थी। माना जा रहा था कि छात्र आंदोलन जाति, धर्म और क्षेत्रीय सीमाओं से ऊपर उठकर राष्ट्रीय स्तर पर समर्थन हासिल कर रहा था। यदि आंदोलन लंबा चलता तो इसका राजनीतिक और सामाजिक असर और व्यापक हो सकता था।
शुरुआत में सुधारों पर रहा सरकार का फोकस
सरकार ने शुरुआती दौर में मंत्री के इस्तीफे के बजाय परीक्षा प्रणाली में सुधार और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई पर जोर दिया। नीट परीक्षा दोबारा आयोजित कराई गई और जांच एजेंसियों ने कथित आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई भी शुरू की।
हालांकि, विपक्ष लगातार शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर अड़ा रहा और छात्र संगठनों का विरोध भी जारी रहा, जिससे सरकार पर दबाव बढ़ता गया।
संसद से सड़क तक बढ़ा दबाव
विपक्ष ने संसद के भीतर और बाहर शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को बड़ा मुद्दा बनाया। लगातार विरोध के कारण संसद की कार्यवाही भी प्रभावित हुई। माना जा रहा है कि इससे सरकार के लिए सार्वजनिक परीक्षाओं में पारदर्शिता और नकल रोकने से जुड़े प्रस्तावित विधेयकों को आगे बढ़ाना भी चुनौतीपूर्ण हो गया था।
सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट भी बनी कारण
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सुरक्षा एजेंसियों ने सरकार को आंदोलन के और उग्र होने तथा कानून-व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका से अवगत कराया था। सरकार किसी भी प्रकार की हिंसा या तनावपूर्ण स्थिति से बचना चाहती थी, इसलिए हालात सामान्य करने के लिए त्वरित निर्णय लिया गया।
चुनावी समीकरण भी रहे अहम
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए भी यह फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि छात्र आंदोलन और लंबा चलता तो विपक्ष इसे बड़ा चुनावी मुद्दा बना सकता था। ऐसे में सरकार ने संभावित राजनीतिक नुकसान को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया।
RSS ने भी संवाद और सुधार पर दिया था जोर
रिपोर्ट्स के अनुसार, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने भी शिक्षा व्यवस्था में सुधार और छात्रों से संवाद बढ़ाने पर जोर दिया था। संघ प्रमुख मोहन भागवत ने हाल ही में कहा था कि आज का युवा तर्क और संवाद के आधार पर समाधान चाहता है तथा उसकी बात सुनना आवश्यक है।
आधिकारिक पुष्टि नहीं
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के पीछे बताए जा रहे इन कारणों को लेकर सरकार की ओर से कोई आधिकारिक विस्तृत बयान जारी नहीं किया गया है। इसलिए युवाओं की नाराज़गी, सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट, चुनावी रणनीति और अन्य राजनीतिक कारणों से जुड़ी बातें फिलहाल विभिन्न मीडिया रिपोर्टों, सूत्रों और राजनीतिक विश्लेषकों के आकलन पर आधारित हैं।