भ्रष्टाचार की हद ! एक डॉक्टर दो जिलों में पदस्थ, पांच साल तक उठाता रहा डबल सैलरी; रिश्वत लेते पकड़े जाने के बाद खुला बड़ा खेल

भोपाल/शहडोल/श्योपुर | RKhabar
मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग में कथित भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही का एक बड़ा मामला सामने आया है। रीवा लोकायुक्त द्वारा रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़े गए संविदा डॉक्टर महेश चंद शर्मा पर अब एक साथ दो जिलों में पदस्थ रहकर वर्षों तक वेतन लेने के गंभीर आरोप लगे हैं। इस खुलासे के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई है।
जानकारी के अनुसार, डॉक्टर महेश चंद शर्मा शहडोल जिले में स्वास्थ्य विभाग में सेवाएं दे रहे थे, जबकि श्योपुर जिले के विजयपुर क्षेत्र स्थित सेहसराम प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भी संविदा डॉक्टर के रूप में उनका नाम दर्ज था। आरोप है कि वर्ष 2021 से उन्हें श्योपुर स्वास्थ्य विभाग की ओर से नियमित रूप से वेतन जारी किया जाता रहा, जबकि वे वहां सेवाएं नहीं दे रहे थे। इस मामले ने विभाग की निगरानी व्यवस्था और अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
रिश्वत प्रकरण के बाद खुली परतें
डॉक्टर महेश चंद शर्मा का नाम उस समय सुर्खियों में आया जब रीवा लोकायुक्त की टीम ने उन्हें कथित रूप से रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया। इस कार्रवाई के बाद उनके सेवा रिकॉर्ड और पदस्थापना से जुड़े दस्तावेजों की जांच की गई, जिसमें दोहरी पदस्थापना और दो स्थानों से वेतन लेने के आरोप सामने आए। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, उनका नाम अन्य जिलों से भी जुड़ा होने की आशंका जताई जा रही है, जिसकी जांच की जा रही है।
अधिकारियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में
मामले के सामने आने के बाद यह सवाल उठ रहे हैं कि यदि डॉक्टर वर्षों से दूसरे जिले में कार्यरत थे, तो श्योपुर स्वास्थ्य विभाग उनकी उपस्थिति और कार्य का सत्यापन कैसे करता रहा। जिन अधिकारियों पर स्वास्थ्य केंद्रों की निगरानी और कर्मचारियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी थी, वे इतने लंबे समय तक इस कथित अनियमितता का पता क्यों नहीं लगा सके। इससे विभागीय मॉनिटरिंग व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग गए हैं।
राष्ट्रपति के दौरे में भी लगी थी ड्यूटी
जानकारी के अनुसार, डॉक्टर महेश चंद शर्मा की ड्यूटी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के कुनो नेशनल पार्क दौरे के दौरान भी लगाई गई थी। इसके बावजूद उनकी वास्तविक पदस्थापना और उपस्थिति का सत्यापन नहीं किया गया। इस पहलू ने भी प्रशासनिक निगरानी की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जांच समिति गठित, एफआईआर और रिकवरी की तैयारी
श्योपुर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. दिलीप सिकरवार ने पूरे मामले की जांच के लिए चार सदस्यीय समिति गठित कर दी है। उन्होंने कहा कि जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। साथ ही डॉक्टर महेश चंद शर्मा के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने और कथित रूप से लिए गए वेतन की रिकवरी की प्रक्रिया भी शुरू की जा सकती है।
विभाग में मचा हड़कंप
रिश्वत प्रकरण और दोहरी पदस्थापना के आरोप सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप की स्थिति है। संबंधित दस्तावेजों की जांच की जा रही है और यह पता लगाया जा रहा है कि इस पूरे मामले में किन अधिकारियों की भूमिका रही। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग के बड़े प्रशासनिक घोटालों में शामिल हो सकता है।
फिलहाल जांच जारी है और विभाग की रिपोर्ट आने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।