राजस्थान बॉर्डर पर सेना के मूवमेंट की सोलर CCTV कैमरों से रैकी, विदेश भेजते लाइव फुटेज, 2 जासूस गिरफ्तार

श्रीगंगानगर। सेना और सुरक्षा बलों की गतिविधियों पर कथित तौर पर नजर रखने के लिए सोलर सीसीटीवी कैमरे का इस्तेमाल किए जाने का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। आरोप है कि इस कैमरे के जरिए रिकॉर्ड होने वाली लाइव फुटेज पाकिस्तान और कनाडा में मौजूद संदिग्ध लोगों तक पहुंचाई जा रही थी। मामले का खुलासा पंजाब पुलिस और काउंटर इंटेलिजेंस विंग की संयुक्त कार्रवाई के दौरान हुआ।
इस प्रकरण में बठिंडा पुलिस ने अमृतसर जिले के अजनाला क्षेत्र के सराए गांव निवासी अशोक कुमार और आकाशदीप सिंह को गिरफ्तार किया है। दोनों आरोपियों से पूछताछ की जा रही है, जबकि पूरे नेटवर्क के मास्टरमाइंड की तलाश जारी है।
तीन महीने से सक्रिय था कैमरा:-
पुलिस के अनुसार, बठिंडा-मलोट नेशनल हाईवे पर सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थान पर सोलर ऊर्जा से संचालित एक कैमरा लगाया गया था। शुरुआती जांच में सामने आया है कि यह कैमरा पिछले करीब तीन महीनों से सक्रिय था और सेना व सुरक्षा बलों की गतिविधियों पर नजर रख रहा था।
जांच एजेंसियों को आशंका है कि कैमरे से प्राप्त वीडियो और लाइव फुटेज पाकिस्तान तथा कनाडा में बैठे संदिग्ध व्यक्तियों तक भेजी जा रही थी। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि आरोपियों ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर श्रीगंगानगर, बठिंडा, हनुमानगढ़ और कपूरथला समेत अन्य क्षेत्रों की भी रेकी की थी।
सेना के मूवमेंट पर रखी जा रही थी नजर:-
प्राथमिक जांच के मुताबिक, कैमरे के जरिए राजस्थान, फाजिल्का और फिरोजपुर सीमा क्षेत्रों की ओर आने-जाने वाले सेना के काफिलों और सुरक्षा बलों की गतिविधियों की निगरानी की जा रही थी। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क से कितनी संवेदनशील जानकारी साझा की गई और इसमें अन्य कौन-कौन लोग शामिल हैं।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि मार्च माह में बठिंडा-मलोट रोड पर एक बिजली के खंभे पर यह सोलर कैमरा लगाया गया था। कैमरा लगातार इलाके की गतिविधियों की रिकॉर्डिंग करने के साथ लाइव प्रसारण भी कर रहा था।
सूत्रों के अनुसार, 10 जून को बठिंडा पुलिस को इस संदिग्ध कैमरे के संबंध में गुप्त सूचना मिली थी। जांच के दौरान पता चला कि आरोपी अशोक कुमार ने कैमरा, चिप और सिम कार्ड की व्यवस्था की थी, जबकि आकाशदीप सिंह ने मौके पर जाकर इसे स्थापित किया था।
श्रीगंगानगर पुलिस ने भी बढ़ाई सतर्कता:-
मामले की गंभीरता को देखते हुए श्रीगंगानगर पुलिस अधीक्षक हरीशंकर ने पंजाब पुलिस से फीडबैक लिया है। उन्होंने बताया कि फिलहाल श्रीगंगानगर से सीधे जुड़े कोई ठोस साक्ष्य सामने नहीं आए हैं, लेकिन जिस जगह यह कैमरा मिला है, वहां से पंजाब, राजस्थान आदि इलाकों से सैन्य वाहनों की आवाजाही रहती है।
उन्होंने कहा कि एहतियात के तौर पर श्रीगंगानगर जिले में लगे सीसीटीवी कैमरों का सत्यापन कराया जा रहा है। उधर, पंजाब पुलिस ने मामले की जांच के लिए विशेष टीमें गठित की हैं। बठिंडा पुलिस और काउंटर इंटेलिजेंस की संयुक्त टीमें सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी साक्ष्यों और मानव खुफिया तंत्र की मदद से पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी हैं।