होर्मुज में अमेरिकी जहाजों की एंट्री पर विवाद, वार्ता विफल होते ही अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ी जुबानी जंग, तनाव फिर गहराया

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इस्लामाबाद वार्ता के बाद अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। बातचीत खत्म होते ही दोनों देशों के बीच तीखी बयानबाजी शुरू हो गई।

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि अब फैसला ईरान के हाथ में है। इस पर ईरान ने कड़ा जवाब दे दिया है।। टोक्यो स्थित ईरानी दूतावास ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए लिखा— “जो तुम जंग के मैदान में हासिल नहीं कर सके, वो बातचीत की मेज पर भी नहीं मिलेगा।”

ईरान ने साफ संकेत दिया कि वह किसी दबाव में झुकने वाला नहीं है। वेंस द्वारा दिए गए “आखिरी और सबसे बेहतर प्रस्ताव” को भी ईरान ने खारिज कर दिया। दूतावास ने कहा कि समझौता कभी एकतरफा नहीं होता, यह दोनों पक्षों की सहमति से ही संभव है।

वेंस के उस बयान पर भी ईरान ने आपत्ति जताई, जिसमें उन्होंने कहा था कि ईरान ने अमेरिकी शर्तें मानने से इनकार किया। ईरान ने इसे “दबाव की राजनीति” बताते हुए कहा कि जो शर्तें युद्ध में नहीं मानी गईं, उन्हें बातचीत में थोपने की कोशिश गलत है।

इस बीच, होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी नया विवाद खड़ा हो गया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने दावा किया कि उसके युद्धपोत USS फ्रैंक ई. पीटरसन और USS माइकल मर्फी ने वहां से गुजरते हुए समुद्री सुरंगों को साफ करने का अभियान शुरू किया है।

हालांकि, ईरान ने इस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया। ईरानी सेना के प्रवक्ता ने कहा कि होर्मुज से किसी भी जहाज की आवाजाही पर नियंत्रण ईरान का है और अमेरिका का दावा बेबुनियाद है।

ईरान ने पाकिस्तान की मेजबानी और प्रयासों की सराहना जरूर की, लेकिन साथ ही वेंस के उस बयान की आलोचना भी की, जिसमें उन्होंने ईरान के लिए “बुरे नतीजों” की चेतावनी दी थी। ईरान ने ऐसे बयानों को गैर-जिम्मेदाराना बताया।

अब जबकि वार्ता विफल हो चुकी है और तनाव बढ़ता जा रहा है, सीजफायर का भविष्य अनिश्चित नजर आ रहा है। दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि आगे हालात किस दिशा में जाते हैं।