Rajasthan Politics: अशोक गहलोत का भाजपा सरकार पर तीखा हमला, बोले- मोदी और प्रदेश के नेता विपक्ष को कुछ नहीं समझते

Rajasthan Politics: राजस्थान की राजनीति में ‘इंतजारशास्त्र’ के जरिए सरकार को घेर रहे पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत रविवार को फिर आक्रामक अंदाज में नजर आए। जयपुर स्थित अपने 49 सिविल लाइंस आवास पर मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने प्रदेश की मौजूदा भाजपा सरकार को “संवेदनहीन” बताया। गहलोत ने कहा कि दुर्भाग्य से न मोदी जी विपक्ष को कुछ समझते हैं और न यहां के लोग।
गहलोत ने कहा कि जो राजस्थान कभी स्वास्थ्य सेवाओं के मामले में देश के लिए मिसाल था, आज वहीं बुजुर्ग और दिव्यांग पेंशन के लिए परेशान हैं और कर्मचारियों को दवाओं के लिए भटकना पड़ रहा है।
‘इंतजारशास्त्र’ को बताया जनता की आवाज:-
अपनी सोशल मीडिया सीरीज ‘इंतजारशास्त्र’ का बचाव करते हुए गहलोत ने कहा कि यह सरकार तक जनता की समस्याएं पहुंचाने का एक सकारात्मक माध्यम है। उन्होंने कहा कि यदि कोई पूर्व मुख्यमंत्री सरकार को जमीनी हकीकत बता रहा है, तो उसे फीडबैक की तरह लेना चाहिए। अगर बातों में सच्चाई है तो सुधार किया जाए, अन्यथा नजरअंदाज कर दिया जाए।
सरकार पर फिजूलखर्ची का आरोप:-
भजनलाल सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए गहलोत ने आरोप लगाया कि सरकार इस वक्त भारी घाटे में है, फिर भी फिजूलखर्ची का इतिहास बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रशासन के जरिए भीड़ जुटाकर सरकारी खर्चे पर कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जो वास्तविक समस्याओं से ध्यान भटकाने का प्रयास है।
RGHS की स्थिति पर चिंता:-
गहलोत ने राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) की मौजूदा हालत पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि दवा विक्रेताओं का करीब 1000 करोड़ रुपये बकाया है, जिसके चलते कई जगह दवाएं मिलना बंद हो गई हैं। वहीं, निजी अस्पतालों ने भी भुगतान न मिलने के कारण इलाज से दूरी बना ली है।
- कर्मचारियों की परेशानी: सेवारत और सेवानिवृत्त कर्मचारी, जो इस योजना पर निर्भर हैं, अब अपनी जेब से खर्च करने को मजबूर हैं।
- पेंशन में देरी: बुजुर्गों, दिव्यांगों और विधवाओं की पेंशन कई महीनों से लंबित है, जिसे लेकर गहलोत ने सरकार पर उदासीनता का आरोप लगाया।
हेल्थ मॉडल पर भी उठाए सवाल:-
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्थान का हेल्थ मॉडल कभी देशभर में सराहा जाता था। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार चाहती तो इसे और मजबूत कर सकती थी, लेकिन अब स्थिति ऐसी हो गई है कि आम लोगों को इलाज के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जनप्रतिनिधियों को तो सुविधाएं मिल रही हैं, जबकि आम कर्मचारी और पत्रकार परेशान हैं।