जल जीवन मिशन घोटाले से सबक: जलदाय विभाग की आईटी सिस्टम पर बड़ी पहल, एआई से होगी पेयजल परियोजनाओं की निगरानी
जल जीवन मिशन घोटाले से सबक: जलदाय विभाग की आईटी सिस्टम पर बड़ी पहल, एआई से होगी पेयजल परियोजनाओं की निगरानी
जयपुर। जल जीवन मिशन में सामने आए 2500 करोड़ रुपए के कथित घोटाले के बाद जलदाय विभाग ने भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए आईटी सिस्टम लागू करने का फैसला किया है। विभाग ने पाइपलाइन, टंकी, ट्यूबवेल और कनेक्शन जैसे कार्यों की निगरानी ऑनलाइन करने का प्रस्ताव तैयार कर वित्त विभाग को भेजा है।
उच्च स्तरीय मंजूरी मिलने के बाद पेयजल परियोजनाओं में एमबी भरने से लेकर भुगतान तक की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी। प्रस्ताव के तहत आईटी सिस्टम विकसित करने पर करीब 50 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है।
एआई से होगी प्रोजेक्ट्स की निगरानी:-
आईटी सिस्टम लागू होने के बाद जल जीवन मिशन के तहत चल रहे सभी कार्यों की एआई आधारित मॉनिटरिंग की जाएगी। फील्ड में बिछाई जा रही पाइपलाइन, ट्यूबवेल और टंकियों की स्थिति सीधे कार्यालय से देखी जा सकेगी, जिससे गड़बड़ी पर तुरंत कार्रवाई संभव होगी।
हर समय मिलेगा ऑनलाइन अपडेट:-
सबडिवीजन और डिविजन स्तर पर ठेकेदारों द्वारा किए गए कार्यों की रियल टाइम जानकारी सिस्टम पर उपलब्ध रहेगी। कितना काम पूरा हुआ और कितना शेष है, इसकी पूरी रिपोर्ट ऑनलाइन दिखेगी। पाइपलाइन चोरी या हेरफेर को भी सिस्टम तुरंत पकड़ सकेगा।
जियो टैगिंग और फोटो अनिवार्य:-
एआई आधारित सिस्टम के जरिए हर कार्य की जियो टैगिंग और फोटो ऑनलाइन अपलोड करनी होगी। इससे गुणवत्ता में हेरफेर करना मुश्किल होगा और अधिकारियों को बार-बार फील्ड में जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
यूं सामने आया घोटाला:-
जांच में सामने आया कि जल जीवन मिशन के तहत ठेका फर्मों और विभागीय कार्मिकों की मिलीभगत से बिना काम किए भुगतान कर दिया गया। कई जगह पाइपलाइन बिछाई ही नहीं गई, वहीं घटिया सामग्री और ड्राइंग-डिजाइन में बदलाव भी किया गया।
एसीबी की जांच के बाद ईडी ने भी मामले में कार्रवाई शुरू की। पूर्व जलदाय मंत्री महेश जोशी समेत कई अधिकारी और ठेका फर्म संचालक गिरफ्तार हो चुके हैं। जांच की रफ्तार को देखते हुए आने वाले समय में और खुलासों की संभावना जताई जा रही है।
घोटाले से सबक:-
2500 करोड़ के कथित घोटाले से विभाग की छवि को भारी नुकसान पहुंचा। इससे सबक लेते हुए जलदाय विभाग ने अब पारदर्शिता बढ़ाने और भ्रष्टाचार रोकने के लिए आईटी सिस्टम को लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। मंजूरी मिलने पर पेयजल परियोजनाओं में गड़बड़ी करना ठेका फर्मों के लिए आसान नहीं रहेगा।