बीकानेर: तेल-गैस संकट के बीच बड़ा फैसला, जल संकट टालने के लिए 30 मार्च तक नहीं होगी नहरबंदी
बीकानेर। ईरान-अमेरिका के बीच जारी तनाव से वैश्विक ऊर्जा संकट के हालात बने हुए हैं। ऐसे में राजस्थान सरकार ने प्रदेश के कई जिलों में संभावित जल संकट को टालने के लिए नहरबंदी को फिलहाल आगे बढ़ा दिया है। पहले 15 मार्च से प्रस्तावित नहरबंदी को अब 30 मार्च के बाद लागू करने का निर्णय लिया गया है। इस संबंध में राज्य सरकार ने पंजाब सरकार को पत्र भेजकर संशोधित प्रस्ताव भेज दिया है।
प्रदेश के श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, बीकानेर, चूरू और जैसलमेर सहित कई जिलों को नहरी तंत्र से सिंचाई और पेयजल के लिए पानी मिलता है। वहीं बाड़मेर, जैसलमेर, फलौदी, झुंझुनूं, जोधपुर और नागौर जिलों को भी पेयजल के लिए नहर का पानी उपलब्ध कराया जाता है। इसके अलावा सूरतगढ़ थर्मल पावर प्लांट और बाड़मेर रिफाइनरी जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं में भी इंदिरा गांधी नहर का पानी उपयोग होता है।
पहले नहरबंदी 15 मार्च से प्रस्तावित थी, लेकिन अंतरराष्ट्रीय हालात को देखते हुए इसे पहले 20 मार्च तक टालने का प्रस्ताव भेजा गया था। अब ऊर्जा संकट की आशंका और जल भंडारण की स्थिति को ध्यान में रखते हुए इसे और आगे बढ़ाकर 30 मार्च से लागू करने का प्रस्ताव जल संसाधन विभाग ने पंजाब सरकार को भेजा है।
नए प्रस्ताव के अनुसार 30 मार्च से 15 दिनों की आंशिक नहरबंदी होगी, जबकि 16 अप्रैल से 14 मई तक 30 दिनों की पूर्ण नहरबंदी लागू की जाएगी।
नहर के पानी का उपयोग प्रदेश में ऊर्जा उत्पादन के लिए भी किया जाता है। सूरतगढ़ थर्मल प्लांट को करीब 150 क्यूसेक, बाड़मेर रिफाइनरी को 50 क्यूसेक, नेवली ऊर्जा प्लांट को 20 क्यूसेक और अन्य ऊर्जा परियोजनाओं को लगभग 20 क्यूसेक पानी नहर से मिलता है।
हर साल नहरी तंत्र के रखरखाव और मरम्मत के लिए पश्चिमी राजस्थान की गंगनहर, इंदिरा गांधी नहर परियोजना और भाखड़ा नहर में करीब 45 दिनों की बंदी ली जाती है, जो आमतौर पर 15 मार्च से 30 मई के बीच होती है। हालांकि इससे पहले कोरोना काल (2020-21) और वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव के दौरान भी नहरबंदी नहीं की गई थी।
अधिकारियों के अनुसार नहरबंदी से पहले पेयजल और अन्य जरूरतों के लिए पर्याप्त जल भंडारण किया जाता है। मौजूदा परिस्थितियों में 20 मार्च तक पर्याप्त जल भंडारण संभव नहीं हो पा रहा था, इसलिए नहरबंदी को 30 मार्च तक आगे बढ़ाने का प्रस्ताव भेजा गया है।
आईजीएनपी के एडिशनल चीफ विवेक गोयल ने बताया कि जल आपूर्ति प्रभावित न हो, इसके लिए जल भंडारण की व्यवस्था को देखते हुए नहरबंदी की तिथि आगे बढ़ाई जा रही है।