बीकानेर: आखिर ऐसा क्या हुआ की चिकित्सा शिक्षा आयुक्त को भंग करनी पड़ी ये कमेटी
बीकानेर: आखिर ऐसा क्या हुआ की चिकित्सा शिक्षा आयुक्त को भंग करनी पड़ी ये कमेटी
बीकानेर। पीबीएम हॉस्पिटल में सीटी एमआरआई के टेंडर को लेकर गठित टेक्निकल कमेटी में एक ऐसे डॉक्टर को शामिल कर लिया गया, जिनकी डायग्नोस्टिक लैब है। इस बात का खुलासा टेंडर अपलोड होने के छह महीने बाद एक अपील के फैसले से हुआ है। चिकित्सा शिक्षा आयुक्त ने कमेटी को भंग करते हुए दुबारा बनाने के निर्देश दिए हैं।
राजस्थान मेडिकेयर रिलीफ सोसायटी के तहत सीटी एमआरआई का स्पेसिफिकेशन तय करने के लिए टेक्निकल कमेटी का गठन पिछले साल अगस्त में किया गया था। इस कमेटी में रेडियोडायग्नोसिस विभाग के प्रोफेसर डॉ. सचिन बांठिया को भी शामिल किया गया। सीटी एमआरआई का स्पेसिफिकेशन तैयार करने में उनकी भूमिका अहम रही, जबकि डॉ. बांठिया एक डायग्नोस्टिक सेंटर चला रहे हैं।
आरोप है कि डॉ. बांठिया कमेटी के अन्य सदस्यों, मापदंड और शर्तों प्रभावित कर सकते हैं। सुनवाई के दौरान डॉ. बांठिया ने भी स्वीकार किया कि वे कुछ फर्मों के साथ बाहर कार्य करते हैं। इस पर आयुक्त नरेश कुमार गोयल ने इसे राजस्थान लोक उपापन में पारदर्शिता का उल्लंघन मानते हुए डॉ. बांठिया के स्थान पर मेडिकल कॉलेज के किसी अन्य सदस्य को कमेटी में शामिल करने के निर्देश अधीक्षक को दिए हैं। उन्हांेने साफ कहा है कि समान प्रकृति के अन्य कार्यों की निविदा में हितबद्ध व्यक्तियों को नहीं रखा जाए।