कच्चे तेल की सप्लाई में बाधा से महंगाई से लेकर GDP तक पर होगा बड़ा असर, एक्सपर्ट्स से समझिए
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिली है। अमेरिका और इजराइल द्वारा 28 फरवरी को ईरान पर संयुक्त हमले के बाद ब्रेंट क्रूड 73 डॉलर से बढ़कर 117 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। तेल आयात पर निर्भर भारत जैसे देशों के लिए यह स्थिति चिंता बढ़ाने वाली मानी जा रही है, क्योंकि भारत अपनी 85 प्रतिशत से अधिक तेल जरूरत आयात से पूरी करता है।
महंगाई पर पड़ सकता है असर:-
अर्थशास्त्रियों के अनुसार यदि तेल की कीमतें ऊंची बनी रहीं तो वित्त वर्ष 2027 में भारत की महंगाई 10 से 20 बेसिस पॉइंट तक बढ़ सकती है। एचडीएफसी बैंक का अनुमान है कि 65 डॉलर प्रति बैरल पर महंगाई 4.3 प्रतिशत रह सकती है, लेकिन कीमत 75 डॉलर होने पर इसमें 20 बेसिस पॉइंट तक बढ़ोतरी संभव है। बैंक की प्रमुख अर्थशास्त्री साक्षी गुप्ता का कहना है कि संकट लंबा खिंचने पर असर 50 बेसिस पॉइंट तक पहुंच सकता है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर निर्भरता:-
भारत का करीब आधा कच्चा तेल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर आता है। वित्त वर्ष 2026 के पहले दस महीनों में लगभग 47 प्रतिशत आयात सऊदी अरब, यूएई, कुवैत और इराक जैसे मध्य-पूर्वी देशों से हुआ। डीबीएस बैंक की वरिष्ठ अर्थशास्त्री राधिका राव के अनुसार यदि तेल की कीमतें आरबीआई के 70 डॉलर प्रति बैरल के अनुमान से ज्यादा बढ़ती हैं तो महंगाई पर करीब 30 बेसिस पॉइंट का अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
GDP और चालू खाता घाटे पर असर:-
बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनाविस के मुताबिक यदि तनाव लंबा चला तो आपूर्ति में बाधा से जीडीपी 20 से 30 बेसिस पॉइंट तक घट सकती है। वहीं आरबीआई के विश्लेषण के अनुसार कच्चे तेल की कीमतों में 10 प्रतिशत बढ़ोतरी से जीडीपी पर करीब 15 बेसिस पॉइंट का नकारात्मक असर पड़ता है। केयरएज रेटिंग्स का अनुमान है कि तेल 80 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर रहने पर वित्त वर्ष 2027 में चालू खाता घाटा जीडीपी के 1.3 से 1.8 प्रतिशत तक पहुंच सकता है।
फिलहाल राहत की उम्मीद:-
हालांकि फिलहाल पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में तुरंत बदलाव की संभावना कम मानी जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार तेल कंपनियां कुछ समय तक नुकसान खुद उठाकर उपभोक्ताओं पर सीधा बोझ सीमित रख सकती हैं, लेकिन इसका असर कंपनियों के मार्जिन और देश के आयात बिल पर जरूर पड़ेगा।