कैबिनेट मंत्री डॉ किरोड़ी लाल मीणा ने फिर दी इस्तीफा देने की चेतावनी, डिपार्टमेंट की टीम पर 20 लाख की रिश्वत के आरोपों से हैं आहत

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कैबिनेट मंत्री डॉ किरोड़ी लाल मीणा ने फिर दी इस्तीफा देने की चेतावनी, डिपार्टमेंट की टीम पर 20 लाख की रिश्वत के आरोपों से हैं आहत

जयपुर। सीकर में कृषि विभाग और बीज कारोबारियों के बीच उपजा विवाद अब राजनीतिक रंग लेता नजर आ रहा है। सांवली रोड पर हुई झड़प, राजकार्य में बाधा और विभागीय टीम पर लगाए गए रिश्वत के आरोपों को लेकर कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने पहली बार खुलकर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने विभागीय टीम का बचाव करते हुए कहा कि किसानों के हितों के लिए की गई कार्रवाई को झूठे आरोपों से कमजोर नहीं किया जा सकता।

विभागीय टीम के समर्थन में उतरे मंत्री:-

सीकर में जिला कृषि आदान विक्रेता संस्थान और विकास सीड्स के संचालकों द्वारा कृषि विभाग के कर्मचारियों पर लगाए गए मानसिक प्रताड़ना और अवैध वसूली के गंभीर आरोपों को कृषि मंत्री ने सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी बात रखते हुए साफ किया कि उनकी टीम किसी भी तरह के गलत काम में लिप्त नहीं थी, बल्कि वे राज्य के गरीब किसानों की फसलों को बर्बाद होने से बचाने के लिए अपनी आधिकारिक ड्यूटी निभा रहे थे।

कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने अपनी पोस्ट में लिखा, “नकली बीज माफियाओं के खिलाफ हमारी टीम ने पूरी निष्ठा और ईमानदारी से कार्रवाई की। झूठे आरोप लगाकर किसानों की लड़ाई को कमजोर नहीं किया जा सकता। यदि भ्रष्टाचार का एक भी आरोप सिद्ध हो जाए तो पद छोड़ दूँगा। लेकिन किसानों के हितों से समझौता कभी नहीं होगा।”

20 लाख रुपए रिश्वत मांगने के आरोपों पर प्रतिक्रिया:-

व्यापारियों द्वारा विभागीय कर्मचारियों पर 20 लाख रुपए रिश्वत मांगने के आरोप लगाए गए हैं। इस पर मंत्री ने कहा कि कुछ लोगों द्वारा विभागीय कार्रवाई को प्रभावित करने के लिए ऐसे आरोप लगाए जा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि उनकी टीम के खिलाफ कोई आरोप तथ्यात्मक रूप से सिद्ध होता है तो वह तत्काल पद छोड़ देंगे।

क्या है पूरा मामला:-

जानकारी के अनुसार 4 जून को कृषि विभाग की टीम सीकर के चौराहे के पास स्थित एक होटल और बीकानेर बाईपास पर संचालित विकास सीड्स और बालाजी एग्रो इंडस्ट्रीज के गोदामों से शुरू हुआ था। कृषि विभाग के कर्मचारी संदीप कुमार और रजनीश कुमार एक गोपनीय इनपुट के आधार पर वहां खीरे के नकली और अमानक बीजों की अवैध री-पैकिंग की जांच करने पहुंचे थे। विभागीय टीम का आरोप है कि जांच के दौरान स्थानीय व्यापारियों और उनके सहयोगियों ने उनके साथ गंभीर मारपीट की, राजकार्य में बाधा पहुंचाई और उन्हें गाड़ी में डालकर अपहरण करने का प्रयास किया, जिसकी एफआईआर (FIR) सदर थाने में दर्ज कराई गई।

वहीं दूसरी ओर व्यापारियों का आरोप है कि कृषि विभाग के ये कर्मचारी वैध व्यापार को बंद करने की धमकी देकर 20 लाख रुपए की घूस मांग रहे थे और प्रताड़ित कर रहे थे।

कांग्रेस ने भी साधा निशाना:-

मामले को लेकर विपक्ष भी सक्रिय हो गया है। कांग्रेस नेताओं ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है। वहीं मंत्री के बयान के बाद यह विवाद प्रदेश की राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है।

पहले भी दे चुके हैं इस्तीफे की चेतावनी:-

डॉ. किरोड़ी लाल मीणा अपने बेबाक बयानों और सख्त रुख के लिए जाने जाते हैं। इससे पहले भी विभिन्न मुद्दों पर वह सार्वजनिक रूप से इस्तीफे की पेशकश कर चुके हैं। ऐसे में इस बार दिया गया उनका बयान भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।