राजस्थान के 60 हजार शिक्षकों पर मंडराया नौकरी का संकट! 2028 तक टेट पास करना होगा अनिवार्य

post 553 (1)

जयपुर। सरकारी स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों के लिए टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (TET) पास करने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का असर प्रदेश के करीब 60 हजार तृतीय श्रेणी शिक्षकों पर पड़ेगा। इन शिक्षकों को अब 31 अगस्त 2028 तक अनिवार्य रूप से टेट परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी। निर्धारित समय तक परीक्षा पास नहीं करने पर उनकी सरकारी सेवा पर संकट खड़ा हो सकता है। यह फैसला विशेष रूप से उन शिक्षकों को प्रभावित करेगा, जिनकी नियुक्ति वर्ष 2010 में टेट व्यवस्था लागू होने से पहले हुई थी।

दरअसल, उस समय शिक्षक भर्ती के लिए टेट अनिवार्य नहीं थी, इसलिए बड़ी संख्या में शिक्षक बिना टेट परीक्षा उत्तीर्ण किए ही सरकारी सेवा में नियुक्त हुए थे। अब सुप्रीम कोर्ट ने सेवारत शिक्षकों के लिए भी टेट पास करना अनिवार्य कर दिया है, जिससे हजारों शिक्षकों के सामने सेवा में बने रहने की चुनौती खड़ी हो गई है। इनमें कई ऐसे शिक्षक भी शामिल हैं, जो तीन दशक से अधिक समय से अध्यापन कार्य कर रहे हैं।

अब 31 अगस्त 2028 तक की मोहलत

सुप्रीम कोर्ट ने सितंबर 2025 में दिए अपने फैसले में सभी शिक्षकों के लिए टेट पास करना अनिवार्य बताया था। साथ ही सेवारत शिक्षकों को सेवा जारी रखने और पदोन्नति के लिए दो वर्ष के भीतर टेट उत्तीर्ण करने का समय दिया गया था। बाद में शिक्षकों की ओर से पुनर्विचार याचिका दायर की गई, जिस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने टेट की अनिवार्यता बरकरार रखी, लेकिन शिक्षकों को राहत देते हुए समय सीमा एक वर्ष बढ़ा दी। अब शिक्षकों को 31 अगस्त 2028 तक टेट परीक्षा पास करनी होगी।

कई शिक्षकों के सामने बड़ी चुनौती

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद कुछ शिक्षकों को 32 से 34 वर्ष की सेवा पूरी करने के बावजूद पात्रता परीक्षा देनी पड़ सकती है। यदि किसी शिक्षक की नियुक्ति 21 वर्ष की आयु में हुई थी और वर्ष 2028 में उसकी आयु 55 वर्ष से कम रहती है, तो उसे टेट से छूट नहीं मिलेगी। इस आधार पर वर्ष 1994 या उसके आसपास नियुक्त हुए कई शिक्षक भी इस दायरे में आ सकते हैं। ऐसे शिक्षकों के लिए लंबे समय बाद फिर से परीक्षा की तैयारी करना और वर्तमान प्रतिस्पर्धी माहौल में पात्रता परीक्षा पास करना बड़ी चुनौती माना जा रहा है।

पांच वर्ष से कम सेवा शेष वालों को राहत

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी स्पष्ट किया है कि जिन शिक्षकों की सेवानिवृत्ति में पांच वर्ष से कम समय बचा है, उन्हें टेट परीक्षा से छूट मिलेगी। टेट की अनिवार्यता केवल उन्हीं शिक्षकों पर लागू होगी, जिनकी सेवा अवधि में पांच वर्ष से अधिक समय शेष है।

करीब 60 हजार शिक्षक होंगे प्रभावित

प्रारंभिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में वर्तमान में लगभग 2.40 लाख तृतीय श्रेणी शिक्षक कार्यरत हैं। वर्ष 2012 से 2023 के बीच रीट पात्रता के आधार पर हुई विभिन्न भर्तियों में करीब 1.91 लाख शिक्षकों की नियुक्ति की गई थी। पदोन्नति और अन्य सेवाओं में जाने के बाद लगभग 1.45 लाख शिक्षक टेट पात्रता व्यवस्था के दायरे में सुरक्षित माने जा रहे हैं।

वहीं शिक्षा विभाग में करीब 35 हजार पद अभी भी रिक्त हैं। ऐसे में वर्ष 2012 से पहले नियुक्त हुए लगभग 60 हजार शिक्षकों के सामने टेट पात्रता को लेकर असमंजस और चिंता की स्थिति बन गई है।

शिक्षक संगठनों ने की हस्तक्षेप की मांग

मामले को लेकर विभिन्न शिक्षक संगठनों ने केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है। राष्ट्रीय शिक्षक संघ और अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ सहित कई संगठनों का कहना है कि प्रभावित शिक्षकों की नियुक्तियां उस समय लागू नियमों और सरकारी प्रक्रियाओं के तहत की गई थीं।

संगठनों के पदाधिकारियों का कहना है कि इन शिक्षकों ने वर्षों तक शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में योगदान दिया है, इसलिए सरकार को उनके हितों की रक्षा के लिए उचित विधायी और प्रशासनिक समाधान निकालना चाहिए। वहीं, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब प्रभावित शिक्षकों की नजर सरकार और शिक्षा विभाग की आगामी रणनीति पर टिकी हुई है।