बीकानेर: जलाशयों में बचा बस इतने दिन का स्टॉक, मरम्मत की सुस्त चाल ने बढ़ाई चिंता

बीकानेर: जलाशयों में बचा बस इतने दिन का स्टॉक, मरम्मत की सुस्त चाल ने बढ़ाई चिंता
बीकानेर। प्रदेश की जीवनरेखा इंदिरा गांधी नहर में चल रही नहरबंदी अब अपने सबसे कठिन दौर में प्रवेश कर चुकी है। पंजाब क्षेत्र में आरडी 179 से 496 के बीच चल रही नहर रिलाइनिंग की रफ्तार ने बीकानेर जलदाय विभाग की चिंताएं बढ़ा दी हैं। गणित सीधा और डराने वाला है: बीकानेर के जलाशयों में मात्र 18 मई तक का पानी शेष है और नहर का नया पानी भी तमाम परिस्थितियां अनुकूल रहने पर ही 18 मई तक पहुंचने की उम्मीद है। यदि पंजाब में कार्य के कारण पानी छूटने में 24 घंटे की भी देरी हुई, तो शहर में भीषण पेयजल संकट खड़ा हो सकता है। नहरबंदी का शेड्यूल 10 मई की शाम को समाप्त होना है, लेकिन पंजाब सीमा में लंबित 16.5 किलोमीटर की रिलाइनिंग अब भी बड़ी बाधा है।
वस्तुस्थिति का जायजा लेने के लिए हनुमानगढ़ जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता प्रदीप रुस्तगी बुधवार को खुद पंजाब रवाना हुए हैं। शहर की प्यास बुझाने वाले शोभासर और बीछवाल जलाशय वर्तमान में ‘जीरो मार्जिन’ पर हैं। शोभासर में 565 मिलियन लीटर (12 दिन का स्टॉक) और बीछवाल में 550 मिलियन लीटर (13 दिन का स्टॉक) ही बचा है। यदि पंजाब से 11 मई की सुबह पानी छोड़ा जाता है, तो उसे राजस्थान बॉर्डर (मसीतावाली हेड) तक आने में 3 से 4 दिन लगेंगे। वहां से बिरधवाल हेड पहुंचने में डेढ़ दिन और लगेगा। चूंकि कंवरसेन लिफ्ट नहर ऊंचाई पर है, इसलिए बिरधवाल पर पहले वाटर लेवल बनाया जाएगा, फिर पंपिंग शुरू होगी। इस पूरी प्रक्रिया के बाद बीकानेर तक पानी पहुंचने की संभावित तारीख 17 मई की रात या 18 मई की सुबह है। अगले 10 दिन बीकानेर के लिए ‘वाटर इमरजेंसी’ जैसे हैं। हकीकत पंजाब में चल रही सीमेंट रिलाइनिंग और ईंटों की जुड़ाई पर टिकी है। यदि मुख्य अभियंता की टीम सकारात्मक रिपोर्ट लेकर नहीं लौटती, तो जलाशयों का तल अगले हफ्ते दिखने लगेगा। अब सारा दारोमदार पंजाब की कार्यप्रणाली और राजस्थान के सिंचाई विभाग के दबाव पर है।