धमकी या गलतफहमी? भाटी ने तोड़ी चुप्पी, रावणा के आरोपों पर दिया करारा जवाब

Copy-of-Logo-Banner-2026-03-28T150338.239

राजस्थान के चर्चित युवा विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने भजन गायक छोटू सिंह रावणा के आरोपों पर अपना पक्ष रखते हुए कड़ा जवाब दिया है। भाटी ने मीडिया से बातचीत में स्वीकार किया कि उन्होंने फोन पर आपत्ति दर्ज करवाई थी, लेकिन उसे ‘धमकी’ का रूप देना गलत है। उन्होंने साफ कहा कि राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप आम बात है, लेकिन किसी को भी किसी के राजनीतिक नैरेटिव का औजार नहीं बनना चाहिए।

विवाद की जड़: पुराना वीडियो बना कारण:-

विधायक भाटी ने पूरे मामले की पृष्ठभूमि स्पष्ट करते हुए बताया कि विवाद एक कैंसर पीड़ित बच्चे के पुराने वीडियो से शुरू हुआ। करीब दो साल पुराने इस वीडियो को सोशल मीडिया पर फिर से वायरल किया गया। भाटी के मुताबिक, वीडियो में दिखाया गया बच्चा अब पूरी तरह स्वस्थ हो चुका है। इसी वीडियो पर गायक रावणा ने बिना पूरी जानकारी के कमेंट किया, जिस पर भाटी ने आपत्ति जताई।

‘धमकी नहीं, सिर्फ आपत्ति’

छोटू सिंह रावणा ने आरोप लगाया था कि भाटी ने फोन पर उन्हें सख्त लहजे में चेतावनी दी। इस पर भाटी ने सफाई देते हुए कहा-“मैंने केवल आपत्ति दर्ज करवाई थी, जो एक जनप्रतिनिधि के नाते मेरा अधिकार है। बिना तथ्य जाने किसी भी मुद्दे पर टिप्पणी करना और नैरेटिव बनाना गलत है। मैं लोगों की मदद करने वाला हूं, धमकी देने वाला नहीं।”

‘पॉलिटिकल टूल’ बनने से बचने की नसीहत

भाटी ने कहा कि उन्होंने गायक को केवल यह समझाया कि वे किसी राजनीतिक नैरेटिव का हिस्सा न बनें। उन्होंने कहा कि प्रतिक्रिया देने से पहले तथ्यों की जांच जरूरी है। साथ ही यह भी याद दिलाया कि रावणा उनके ही विधानसभा क्षेत्र शिव के निवासी हैं, इसलिए जिम्मेदारी और बढ़ जाती है।

‘सस्ती लोकप्रियता’ का आरोप

विधायक ने रावणा के आरोपों को सस्ती लोकप्रियता हासिल करने की कोशिश बताया। उनका कहना है कि उनकी बढ़ती लोकप्रियता के चलते कुछ लोग जानबूझकर विवाद खड़ा कर रहे हैं।

फोन कॉल विवाद और बढ़ा तनाव:-

रावणा का दावा है कि रात करीब 11 बजे भाटी का फोन आया, जिसमें उन्होंने कहा— “दो बार मैंने तुम्हें छोड़ दिया, अब मुझे तुम्हें सीधा करना भी आता है।” गायक ने इसे अप्रत्यक्ष धमकी बताया।

अब इस पूरे मामले ने पश्चिमी राजस्थान में सियासी माहौल गरमा दिया है। सोशल मीडिया पर दोनों पक्षों के समर्थक आमने-सामने हैं। बहस इस बात पर छिड़ी हुई है कि जनप्रतिनिधि द्वारा दी गई चेतावनी को ‘धमकी’ माना जाए या ‘सुधार की कोशिश’।