SOG Action: एसआई भर्ती सहित कई परीक्षाओं में डमी कैंडिडेट गैंग का पर्दाफाश, 15 आरोपी गिरफ्तार

जयपुर। राजस्थान में प्रतियोगी परीक्षाओं में फर्जीवाड़े पर बड़ी कार्रवाई करते हुए स्पेशल ऑपरेशन्स ग्रुप (SOG) ने डमी अभ्यर्थियों से परीक्षा दिलाने वाले संगठित गिरोह का खुलासा किया है। एसआई भर्ती परीक्षा 2025 समेत विभिन्न परीक्षाओं से जुड़े इस मामले में 13 मूल अभ्यर्थियों और 2 डमी सहित कुल 15 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। ये आरोपी जोधपुर, उदयपुर, भरतपुर और टोंक से पकड़े गए हैं और लंबे समय से फरार चल रहे थे।
पुराने मामलों से खुला राज:-
जांच के दौरान बीएसटीसी (प्री डीएलएड/बीएलएड) परीक्षा 2019-20 से जुड़े 12 मूल अभ्यर्थियों को भी गिरफ्तार किया गया, जिनमें 11 उदयपुर और 1 भरतपुर का निवासी है।
एडीजी एसओजी विशाल बंसल के अनुसार, वर्ष 2021 में पाली जिले के रोहट थाने में अशोक सारण की गिरफ्तारी के बाद इस पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ था। इसके बाद एसओजी ने मामला दर्ज कर गहन जांच शुरू की।
दस्तावेजों से हुआ फर्जीवाड़े का खुलासा:-
जांच के दौरान बीकानेर स्थित पंजीयक, शिक्षा विभागीय परीक्षाएं कार्यालय से मूल दस्तावेज मंगवाए गए। संदिग्ध अभ्यर्थियों के हस्ताक्षर और लिखावट का एफएसएल से मिलान कराया गया, जिसमें परीक्षा देने वाले और वास्तविक अभ्यर्थियों के हस्ताक्षर अलग पाए गए। इससे डमी कैंडिडेट गैंग की पुष्टि हुई।
उदयपुर-भरतपुर से बड़ी गिरफ्तारी:-
एसओजी ने उदयपुर के जगदीश गमार, जीवतराम मोडिया, लक्ष्मी कुमारी, मन्नालाल भगौरा, मुकेश गमार, लोकेश कुमार, प्रेम कुमारी, राहुल बोडात, संजय कुमार डामोर, विक्रम कुमार, विशाल कुमार और भरतपुर के रवीन्द्र सिंह मुसावत को गिरफ्तार किया है।
अन्य परीक्षाओं में भी खुलासे:-
- पटवारी भर्ती परीक्षा 2021
फूलसिंह मीणा की जगह परीक्षा देने वाले डमी अभ्यर्थी फलोदी निवासी पप्पूराम को जोधपुर से गिरफ्तार किया गया। आरोपी ने 10 लाख रुपए में डमी बनने की बात कबूली है। - प्राध्यापक (हिंदी) भर्ती परीक्षा 2022
रानीवाड़ा निवासी मनोहर लाल की जगह परीक्षा देने वाले डमी महेंद्र विश्नोई को उदयपुर से पकड़ा गया। वह पहले भी कई भर्तियों में मोटी रकम लेकर डमी बन चुका है। - एसआई भर्ती परीक्षा 2021
टोंक जिले के अलीनगर निवासी सियाराम मीना को गिरफ्तार किया गया है। आरोपी ने 15 लाख रुपए में सौदा कर अपनी जगह दूसरे व्यक्ति को परीक्षा में बैठाया था, जिससे वह अवैध रूप से उत्तीर्ण हुआ।
नेटवर्क की गहराई से जांच जारी:-
एसओजी अब इस गिरोह के पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी है। यह पता लगाया जा रहा है कि अब तक कितनी परीक्षाओं में इस तरह का फर्जीवाड़ा हुआ और इसमें और कौन-कौन लोग शामिल हैं।