RTE : शिक्षा मंत्री मदन दिलावर का वादा निकला झूठा, आरटीई प्रवेश प्रक्रिया को लेकर हुआ चौंकाने वाला खुलासा
RTE : शिक्षा मंत्री मदन दिलावर का वादा निकला झूठा, आरटीई प्रवेश प्रक्रिया को लेकर हुआ चौंकाने वाला खुलासा
कोटा। आरटीई प्रवेश प्रक्रिया को लेकर राज्य में असमंजस की स्थिति बन गई है। एक ओर शिक्षा मंत्री का सार्वजनिक बयान है, तो दूसरी ओर प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय की ओर से जारी आधिकारिक दिशा-निर्देश। दोनों में अंतर सामने आने से निजी विद्यालय संचालकों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
हाल ही में जोधपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने कहा था कि आरटीई प्रवेश के लिए वार्ड आधारित बाध्यता समाप्त कर जिले को आधार बनाया जाएगा, ताकि अभिभावकों को अधिक विकल्प मिल सकें। लेकिन सत्र 2026-27 के लिए जारी टाइम-फ्रेम में प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय ने पहले की तरह ही वार्ड-वाइज प्राथमिकता जारी रखने की बात स्पष्ट की है।
निजी स्कूल संचालक संघ के जिलाध्यक्ष जमना शंकर प्रजापति सहित अन्य पदाधिकारियों का कहना है कि वार्ड आधारित व्यवस्था से अभिभावकों को मनचाहे स्कूल में प्रवेश नहीं मिल पाता और भ्रम की स्थिति बनी रहती है। उन्होंने मांग की है कि मंत्री द्वारा किए गए वादों को लागू कर प्रवेश प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सरल बनाया जाए।
संघ की चेतावनी:-
संघ ने चेतावनी दी है कि यदि घोषित सुधार लागू नहीं किए गए तो इस मुद्दे को लेकर आंदोलन किया जाएगा। उनका कहना है कि पूर्व में भी पांचवीं कक्षा के विद्यार्थियों से 50 रुपये सुविधा शुल्क नहीं लेने की घोषणा की गई थी, लेकिन विभागीय आदेश में शुल्क वसूली जारी है।
इस संबंध में शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि आरटीई के तहत वार्ड के बच्चों को प्राथमिकता मिलेगी, उसके बाद शहर के अन्य बच्चों को अवसर मिलेगा। उन्होंने यह भी कहा कि उनके बयान का अर्थ यह नहीं था कि प्रवेश का आधार पूरा जिला होगा।
चार कक्षाओं में मिलेगा आरटीई के तहत प्रवेश:-
राजस्थान में पहली बार नर्सरी से लेकर पहली कक्षा तक कुल चार कक्षाओं में आरटीई के तहत प्रवेश दिया जाएगा। इसके लिए 20 फरवरी से आवेदन प्रक्रिया शुरू होगी और 6 मार्च को लॉटरी निकाली जाएगी।
प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय की सहायक निदेशक एवं आरटीई प्रभारी चंद्र किरण पंवार ने बताया कि इस बार नर्सरी, एलकेजी, यूकेजी और पहली कक्षा में निशुल्क प्रवेश दिया जाएगा।
आयु सीमा इस प्रकार रहेगी:–
- नर्सरी (3+): 3 से 4 वर्ष
- एलकेजी (4+): 4 से 5 वर्ष
- यूकेजी (5+): 5 से 6 वर्ष
- पहली कक्षा: 6 से 7 वर्ष
ये रहेगा सीट का फार्मूला:-
प्राइवेट स्कूलों में पिछले तीन वर्षों में नर्सरी से पहली कक्षा तक हुए प्रवेश के आंकड़ों का औसत निकाला जाएगा। इसी औसत संख्या की 25% सीटों पर आरटीई के तहत निशुल्क प्रवेश दिया जाएगा।
उदाहरण के तौर पर:–
यदि एलकेजी में 10 सीट निर्धारित हैं और नर्सरी से 8 विद्यार्थी प्रमोट होकर आ गए, तो शेष 2 सीटों पर आरटीई प्रवेश होगा। इसी प्रकार यूकेजी या पहली कक्षा में खाली सीटों के अनुसार प्रवेश दिए जाएंगे।
खाली सीटें अब नहीं रहेंगी खाली:-
पहले नर्सरी में प्रवेश लेने के बाद यदि विद्यार्थी एलकेजी या यूकेजी में स्कूल छोड़ देता था, तो उस सीट पर आरटीई प्रवेश नहीं हो पाता था। अब नई व्यवस्था के तहत इन खाली सीटों को भी भरा जाएगा, जिससे निशुल्क प्रवेश पाने वाले विद्यार्थियों की संख्या में बढ़ोतरी होगी।