Rajasthan : ‘बेटा वैभव CM आवास में नहीं, किराए के मकान में रहा’, आखिर किस बात पर अशोक गहलोत ने कही ऐसी बात?

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Rajasthan : राजस्थान की राजनीति के ‘जादूगर’ कहे जाने वाले Ashok Gehlot ने सोमवार को अपने निजी जीवन और शासनकाल के अनुशासन को लेकर बड़ा बयान दिया। मंत्री पुत्रों के सरकारी कामकाज में दखल को लेकर दिए गए अपने पुराने बयान पर सफाई देते हुए गहलोत ने कहा कि उन्होंने कभी भी परिवार के सदस्यों को राजनीति से दूर रखने की बात नहीं कही, बल्कि उन्हें सरकार के कामकाज से दूर रहने की सलाह दी थी।

इस दौरान गहलोत भावुक भी नजर आए। उन्होंने बताया कि जब वे मुख्यमंत्री थे, तब उनके बेटे Vaibhav Gehlot मुख्यमंत्री निवास में नहीं रहते थे, बल्कि जयपुर में एक किराए के मकान में रहते थे।

‘राजनीति में आएं, लेकिन सरकार से दूर रहें’ का संदेश

गहलोत ने अपने बयान को स्पष्ट करते हुए कहा कि नई पीढ़ी का राजनीति में आना जरूरी और सकारात्मक है। उन्होंने कहा कि नेता अपने बेटे-बेटियों और रिश्तेदारों को राजनीति में ला सकते हैं, ताकि उन्हें अनुभव का लाभ मिले, लेकिन उन्हें सरकारी फैसलों और फाइलों से दूर रखना चाहिए। उन्होंने साफ कहा कि असली आपत्ति परिवार के राजनीति में आने पर नहीं, बल्कि सत्ता और प्रशासन में दखल देने पर है।

वैभव गहलोत का उदाहरण देकर दिया संदेश:-

परिवारवाद के आरोपों पर जवाब देते हुए गहलोत ने अपने कार्यकाल का उदाहरण पेश किया। उन्होंने कहा कि “यह लोग मुझ पर उंगली उठाते हैं, लेकिन सच यह है कि मुख्यमंत्री रहते हुए भी मेरा बेटा कभी मुख्यमंत्री निवास में नहीं रहा। वह किराए के मकान में रहकर अपना जीवन बसर करता था।”

जोधपुर से चुनाव लड़ने का मौका भी पार्टी के फैसले से मिला, न कि उनके दबाव से। गहलोत ने यह भी स्पष्ट किया कि Rajasthan Cricket Association (RCA) से जुड़े मामलों में भी उन्होंने अपने बेटे को कोई विशेष या “आउट ऑफ टर्म” लाभ नहीं दिलाया।

निजी हमलों पर जताई नाराजगी:-

गहलोत ने उन नेताओं पर भी नाराजगी जताई जो उनके परिवार को लेकर व्यक्तिगत टिप्पणियां करते हैं। उन्होंने कहा कि राजनीति में भाषा और मर्यादा का ध्यान रखना जरूरी है। उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि बयान सोच-समझकर देने चाहिए और परिवार को अनावश्यक विवादों में नहीं घसीटना चाहिए।

राजस्थान में ‘परिवारवाद’ पर नई बहस:-

गहलोत के इस बयान के बाद भजनलाल सरकार और मौजूदा सत्तापक्ष के नेताओं पर भी सवाल उठने लगे हैं। राजस्थान की राजनीति में अक्सर यह आरोप लगते रहे हैं कि मंत्रियों के परिजन सरकारी कामकाज में दखल देते हैं। ऐसे में गहलोत का “किराए के मकान” वाला उदाहरण मौजूदा राजनीतिक माहौल में एक नया संदेश देता नजर आ रहा है।

‘रिश्तेदारी नहीं, योग्यता जरूरी’

पूर्व मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि वे किसी भी ऐसे लाभ के खिलाफ हैं जो बिना योग्यता या बिना मेहनत के केवल ‘रिश्तेदारी’ के आधार पर दिया जाता है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे राजनीति में आएं, संघर्ष करें और अपनी मेहनत के दम पर आगे बढ़ें, न कि सीधे सत्ता में हस्तक्षेप करने की कोशिश करें।