Rajasthan: झालावाड़ स्कूल हादसे में हाईकोर्ट ने अधिकारियों को लगाई फटकार, कहा- बजट में कीजिए पक्की व्यवस्था
Rajasthan: झालावाड़ में हुए स्कूल हादसे के बाद राजस्थान हाईकोर्ट में राज्य के स्कूलों की जर्जर हालत पर सुनवाई हुई। कोर्ट लगातार स्वप्रेरित संज्ञान लेकर स्कूलों की स्थिति की जांच कर रहा है। सोमवार को हुई सुनवाई में जस्टिस महेंद्र गोयल और जस्टिस अशोक कुमार जैन की खंडपीठ ने राज्य सरकार और शिक्षा विभाग को कड़ी फटकार लगाई।
कोर्ट ने कहा कि सरकार की रिपोर्ट में सब ठीक बताया गया है, लेकिन धरातल पर वास्तविक स्थिति बिलकुल अलग है। शिक्षा सचिव को निर्देश दिए गए कि वे मुख्य सचिव और वित्त सचिव से मिलकर स्कूलों की मरम्मत के लिए बजट में आवश्यक फंड सुनिश्चित करें।
अधिकारियों पर फटकार:
सुनवाई में शिक्षा शासन सचिव कृष्ण कुणाल और निदेशक सीताराम जाट उपस्थित हुए। कोर्ट ने स्कूलों की मरम्मत के लिए कोई ठोस रोडमैप न पेश करने पर नाराजगी जताई। बूंदी हादसे का उदाहरण देते हुए कहा कि रिपोर्ट के मुताबिक बच्चे भवन गिरने से पहले पेड़ के नीचे सुरक्षित हो गए थे, लेकिन अब वह समय नहीं रहा, पेड़ भी गवाही नहीं दे सकते।
बेटियों के हालात पर गंभीर टिप्पणी:-
कोर्ट ने स्कूलों में स्वच्छता और बुनियादी सुविधाओं की कमी पर भी गंभीर टिप्पणी की। न्यायालय ने कहा कि एक बच्ची जब घर से स्कूल आती है, तो उसे शौचालय जैसी मूलभूत सुविधा उपलब्ध नहीं कराई जा रही। बच्चियां दिनभर कम पानी पीती हैं ताकि उन्हें टॉयलेट न जाना पड़े। कोर्ट ने शिक्षा व्यवस्था में राजनेताओं के ध्यान केवल ट्रांसफर तक सीमित रहने पर भी नाराजगी जताई।
सर्वे रिपोर्ट में मिले alarming आंकड़े:-
राज्य सरकार की सर्वे रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में 5,667 स्कूल जर्जर हालत में हैं। इनमें 86,934 भवन जर्जर पाए गए हैं। वहीं, 17,109 शौचालय पूरी तरह जर्जर हैं और 29,093 शौचालयों की मरम्मत की आवश्यकता है।
कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 16 फरवरी को निर्धारित की है। झालावाड़ पिपलोदी हादसे के बाद हाईकोर्ट लगातार स्कूलों की सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं पर निगरानी कर रहा है। मामले में एनसीपीसीआर की ओर से अधिवक्ता वागीश सिंह ने पैरवी की।


