राजस्थान में रिटायर्ड कर्मचारी की पेंशन बहाल, पंचायत चुनाव पर भी अहम अपडेट, पढ़े पूरी खबर

राजस्थान में रिटायर्ड कर्मचारी की पेंशन बहाल, पंचायत चुनाव पर भी अहम अपडेट, पढ़े पूरी खबर

जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने बुधवार को प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े दो महत्वपूर्ण मामलों में अहम फैसले सुनाए। एक तरफ पंचायतों के पुनर्गठन और मुख्यालय परिवर्तन को चुनौती देने वाली सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया गया, वहीं दूसरी ओर रिटायर्ड कर्मचारी की पूरी पेंशन बहाल करने का आदेश देकर पेंशनर्स को राहत दी गई।

पंचायत पुनर्गठन से जुड़े प्रकरणों में जस्टिस इंद्रजीत सिंह और जस्टिस रवि चिरानिया की खंडपीठ ने मुन्नालाल सहित करीब पांच दर्जन याचिकाएं निरस्त कर दीं। कोर्ट ने कहा कि इसी विषय पर हाईकोर्ट की एक अन्य खंडपीठ पहले ही निर्णय दे चुकी है, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा है। ऐसे में दोबारा न्यायिक हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं बनता।

नियमों की अनदेखी के आरोप खारिज:-

याचिकाकर्ताओं ने नवंबर-दिसंबर 2025 में जारी पंचायत पुनर्गठन की संशोधित अधिसूचनाओं को चुनौती देते हुए नियमों की अनदेखी और जनसुनवाई नहीं होने का आरोप लगाया था। राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता ने दलील दी कि पूरी प्रक्रिया कानून के अनुरूप अपनाई गई और इसका उद्देश्य प्रशासनिक व्यवस्था को सुदृढ़ करना है, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।

सौ फीसदी पेंशन बहाल करने का आदेश:-

दूसरे मामले में जस्टिस अशोक कुमार जैन की एकल पीठ ने रिटायर्ड कर्मचारी विलायती राम की रोकी गई 100 प्रतिशत पेंशन बहाल करने का आदेश दिया। अदालत ने कहा कि जब कर्मचारी विभागीय जांच और आपराधिक मामले दोनों में दोषमुक्त हो चुका है, तो केवल पुलिस के एक बयान के आधार पर पेंशन रोकना न्यायसंगत नहीं है।

कोर्ट ने पेंशन रोके जाने को गलत ठहराते हुए सभी बकाया लाभ शीघ्र जारी करने के निर्देश दिए। इन फैसलों को प्रशासनिक स्थिरता और कर्मचारियों के अधिकारों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पंचायत पुनर्गठन पर न्यायिक मुहर लगने से आगामी पंचायत चुनावों का रास्ता भी साफ हो गया है।

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