‘हमारी जमीन बंजर नहीं, चारागाह है’, राजस्थान में 20 लाख बीघा भूमि को ओरण घोषित करने की मांग, सड़कों पर उतरा जनसैलाब
‘हमारी जमीन बंजर नहीं, चारागाह है’, राजस्थान में 20 लाख बीघा भूमि को ओरण घोषित करने की मांग, सड़कों पर उतरा जनसैलाब
जैसलमेर: सीमावर्ती जैसलमेर जिले में ओरण-गोचर जमीनों को राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज कराने की मांग मंगलवार को और मुखर हो गई। एक ओर ‘टीम ओरण’ की पदयात्रा, जो पिछले महीने तनोट से जयपुर के लिए रवाना हुई थी, अब जोधपुर के निकट पहुंच चुकी है। वहीं दूसरी ओर साधु-संतों के सान्निध्य में हजारों ग्रामीण जिला मुख्यालय पर जुटे और कलेक्ट्रेट के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया।

रामगढ़ मार्ग स्थित आलाजी मंदिर परिसर में आयोजित जनसभा में महंत प्रतापपुरी सहित कई धार्मिक प्रतिनिधि और टीम ओरण के सदस्य मौजूद रहे। सभा के बाद प्रदर्शनकारी गीता आश्रम चौराहा और हनुमान चौराहा होते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे, जहां भारी पुलिस बल तैनात रहा।
20 लाख बीघा भूमि को ओरण घोषित करने की मांग:-
प्रदर्शन में ग्रामीण महिलाओं और बालिकाओं की उल्लेखनीय भागीदारी रही। लोगों ने हाथों में तख्तियां लेकर जिले की करीब 20 लाख बीघा जमीन को ओरण के रूप में राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज करने की मांग उठाई।
महंत प्रतापपुरी ने कहा कि सरकार जनता की भावनाओं को समझती है और मांगों पर गंभीरता से विचार करेगी। वहीं टीम ओरण के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन किसी राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं, बल्कि ओरणों की कानूनी मान्यता के लिए है। वक्ताओं ने चेताया कि यदि सरकार ने सकारात्मक कदम नहीं उठाए तो लंबा आंदोलन किया जाएगा।
कंपनियों को भूमि आवंटन का विरोध:-
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि जिले में निजी और सोलर कंपनियों को अंधाधुंध जमीन आवंटित की जा रही है। उनका कहना है कि जिसे सरकार बंजर भूमि मान रही है, वही क्षेत्र स्थानीय पशुधन के लिए चारागाह और पारंपरिक जल स्रोतों का आधार है।
टीम ओरण के अगुआ सुमेर सिंह सांवता ने कहा कि यदि मांगों की अनदेखी हुई तो जनता बड़े स्तर पर सड़कों पर उतरेगी। पर्यावरण प्रेमी भोपाल सिंह झालोड़ा ने भी लोगों से एकजुट होकर संघर्ष के लिए तैयार रहने का आह्वान किया।

कलेक्टर ने लिया ज्ञापन:-
धरने के बाद प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर प्रताप सिंह को राज्य सरकार के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में ओरण-गोचर भूमि पर किए गए सोलर कंपनियों के आवंटन रद्द करने, जिले की समस्त ओरण भूमि को राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज करने तथा पारंपरिक जल स्रोतों के आसपास के क्षेत्र को संरक्षित घोषित करने की मांग की गई है। गौरतलब है कि रामगढ़ तहसील मुख्यालय पर भी पिछले कई दिनों से भूमि आवंटन के विरोध में धरना जारी है।