JJM Scam : कोर्ट में पेशी के दौरान सुबोध अग्रवाल के बड़े आरोप, पूर्व मुख्य सचिव का नाम लेकर बढ़ाई हलचल, पढ़े खबर

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जयपुर। राजस्थान के बहुचर्चित ‘जल जीवन मिशन’ (JJM) मामले में सोमवार को जयपुर की अदालत में उस समय माहौल गर्म हो गया, जब मुख्य आरोपी और सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी सुबोध अग्रवाल ने मीडिया के सामने तत्कालीन प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए। उन्होंने पूर्व मुख्य सचिव सुधांश पंत का नाम लेते हुए मामले को नया मोड़ दे दिया।

“37 में से केवल 4 केस मेरे कार्यकाल के”

कोर्ट परिसर के बाहर मीडिया से बातचीत में अग्रवाल ने कहा कि उन्होंने एसीबी की जांच में पूरा सहयोग किया है और 125 से अधिक सवालों के जवाब दिए हैं। उन्होंने दावा किया कि फाइनेंस कमेटी से जुड़े 37 मामलों में से केवल 4 उनके कार्यकाल के हैं, जबकि बाकी 33 मामले पूर्व मुख्य सचिव सुधांश पंत के कार्यकाल से जुड़े हैं।

अग्रवाल ने आरोप लगाया कि इन 33 मामलों में करीब 600 करोड़ रुपये का मामला शामिल है। उन्होंने जांच एजेंसी की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि जहां वास्तविक भुगतान हुआ है, वहां जांच नहीं हो रही, जबकि बिना भुगतान वाली फाइलों की जांच की जा रही है।

960 करोड़ के कथित घोटाले में गिरफ्तारी

गौरतलब है कि एसीबी ने सुबोध अग्रवाल को 960 करोड़ रुपये के कथित घोटाले में गिरफ्तार किया है। पिछली सुनवाई में कोर्ट ने एसीबी की 5 दिन की मांग के बजाय 3 दिन का रिमांड मंजूर किया था। इस दौरान जांच टीम ने उनसे 125 सवालों पर पूछताछ की।

अग्रवाल का कहना है कि उन्हें जैसे ही किसी गड़बड़ी की जानकारी मिली, उन्होंने खुद ही इसकी जांच शुरू करवाई थी।

जांच एजेंसी के दावे और अगला कदम:-

एसीबी सूत्रों के मुताबिक, अग्रवाल ने अब तक किसी भी अनियमितता से इनकार किया है। एजेंसी उनके बयानों की पुष्टि दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर कर रही है। अग्रवाल द्वारा पूर्व मुख्य सचिव का नाम लिए जाने के बाद मामला और संवेदनशील हो गया है।

जांच का दायरा बढ़ा:-

इस मामले में एसीबी फिलहाल एक मुख्य केस और एक ट्रैप मामले की जांच कर रही है, जबकि जयपुर में दो अन्य मामले लंबित हैं और डूंगरपुर में भी JJM से जुड़ा एक केस जांचाधीन है। सूत्रों का कहना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ और अहम तथ्य सामने आ सकते हैं।

सियासी हलचल तेज:-

अग्रवाल के आरोपों के बाद प्रदेश के सियासी और प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। एक तरफ जांच एजेंसी सबूत जुटाने में जुटी है, वहीं दूसरी ओर बचाव पक्ष ने गिरफ्तारी के आधारों पर सवाल उठाए हैं, जिससे मामला और हाई-प्रोफाइल होता जा रहा है।