राजस्थान में भी शेयर बाजार के ‘ब्लैक फ्राइडे’ का असर, भारी गिरावट से निवेशकों के करोड़ों रुपये डूबे
राजस्थान में भी शेयर बाजार के ‘ब्लैक फ्राइडे’ का असर, भारी गिरावट से निवेशकों के करोड़ों रुपये डूबे
शेयर बाज़ार में निवेश करने वालों के लिए शुक्रवार की सुबह ‘ब्लैक फ्राइडे’ साबित हुई।। बाजार खुलते ही तेज बिकवाली देखने को मिली और शुरुआती कारोबार में BSE Sensex 800 अंकों से अधिक लुढ़क गया। वहीं Nifty 50 25,600 के अहम स्तर के नीचे फिसल गया। इस तेज गिरावट का असर देशभर के साथ राजस्थान के निवेशकों पर भी साफ नजर आया।
राजस्थान के निवेशकों पर असर:-
जयपुर, मारवाड़ और शेखावाटी क्षेत्र में लंबे समय से शेयर बाज़ार में निवेश की मजबूत परंपरा रही है। बीते कुछ वर्षों में यहां युवाओं और गृहणियों ने भी एसआईपी और डायरेक्ट इक्विटी में जमकर निवेश किया है। ऐसे में बाजार में आई इस तेज गिरावट से कई निवेशकों की पोर्टफोलियो वैल्यू में भारी कमी दर्ज की गई।
जयपुर के जौहरी बाजार और एमआई रोड स्थित ब्रोकिंग फर्म्स के दफ्तरों में में सुबह से ही निवेशकों के फोन लगातार बजते रहे। जानकारी के अनुसार, कुछ छोटे निवेशकों ने घबराहट में शेयर बेचने की भी कोशिश की।
गिरावट की बड़ी वजह क्या?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट घरेलू कारणों से ज्यादा वैश्विक संकेतों का असर है। अमेरिका में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सेक्टर को लेकर बढ़ी अनिश्चितता और टेक शेयरों में कमजोरी का सीधा असर भारतीय आईटी कंपनियों पर पड़ा।
शुरुआती कारोबार में Infosys, Tata Consultancy Services और HCL Technologies के शेयरों में 5 से 6 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। आईटी सेक्टर में कमजोरी से बाजार का सेंटीमेंट और बिगड़ गया। राजस्थान के हजारों युवा इन कंपनियों में कार्यरत हैं और कई के पास इन कंपनियों के शेयर भी हैं, जिससे असर दोहरा रहा।
राजस्थान की कंपनियों का क्या रहा हाल?
बिकवाली के दबाव में राजस्थान से कारोबार रखने वाली कंपनियों के शेयर भी अछूते नहीं रहे। UltraTech Cement और Vedanta Limited के शेयरों में भी कमजोरी देखी गई। इसके अलावा प्रदेश की छोटी और मध्यम श्रेणी की लिस्टेड कंपनियों में 2 से 3 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई।
विशेषज्ञों की सलाह:-
बाजार विश्लेषकों का कहना है कि यह गिरावट लंबी तेजी के बाद एक सामान्य सुधार (हेल्दी करेक्शन) भी हो सकती है। विशेषज्ञ निवेशकों को घबराहट में फैसले लेने से बचने और लंबी अवधि के नजरिए के साथ निवेश बनाए रखने की सलाह दे रहे हैं। उनका मानना है कि बाजार में गिरावट के दौरान मजबूत कंपनियों के शेयर अपेक्षाकृत सस्ते दाम पर खरीदने के अवसर भी मिलते हैं।