Crude Oil Prices Drop: ट्रंप के एक बयान ने ला दी कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त गिरावट, 10% तक टूटे दाम
Crude Oil Prices Drop: मंगलवार सुबह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में करीब 10 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। बाजार में यह बदलाव अमेरिकी राष्ट्रपति के एक बयान के बाद देखने को मिला। दरअसल सोमवार को डोनाल्ड ट्रंप ने मीडिया से बातचीत के दौरान संकेत दिया कि अमेरिका तेल से जुड़े कुछ प्रतिबंध हटाने की दिशा में कदम उठा सकता है। साथ ही उन्होंने जल्द युद्ध समाप्त होने की संभावना भी जताई। ट्रंप के इस बयान से बाजार की चिंताएं कुछ कम हुईं और तेल की कीमतों में आई तेजी पर असर पड़ा।
बयान के बाद तेल के दाम:-
सुबह करीब 8:15 बजे इंटरकॉन्टिनेंटल एक्सचेंज पर अप्रैल ब्रेंट कॉन्ट्रैक्ट 89.36 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था, जो पिछले बंद भाव से लगभग 10 फीसदी कम था। वहीं न्यूयॉर्क मर्केंटाइल एक्सचेंज (NYMEX) पर वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड का भाव 85.79 डॉलर प्रति बैरल दर्ज किया गया।
सोमवार को ब्रेंट क्रूड की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला था और यह जुलाई 2022 के बाद अपने उच्चतम स्तर 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था। हालांकि ट्रंप के बयान के बाद बाजार में गिरावट का रुख देखने को मिला।
ईरान को ट्रंप की चेतावनी:-
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर ट्रंप ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि वह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर तेल आपूर्ति में बाधा डालने की कोशिश करता है, तो अमेरिका की ओर से कड़ा जवाब दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि फिलहाल उन्हें नहीं लगता कि यह संघर्ष इसी सप्ताह खत्म होगा, लेकिन अमेरिका तेल की कीमतों को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहा है।
भारत पर पड़ सकता है असर:-
सोमवार को लोकसभा में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि भारतीय उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 90 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में बदलाव का सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।
अनुमानों के मुताबिक यदि कच्चे तेल की कीमत में 1 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी पूरे साल बनी रहती है, तो भारत का वार्षिक आयात बिल करीब 16,000 करोड़ रुपये तक बढ़ सकता है।
उत्पादन में भी कटौती:-
युद्ध के बीच इराक ने अपने तेल उत्पादन में रोजाना लगभग 13 लाख बैरल की कटौती की है। इराक का कहना है कि उसके पास फिलहाल पर्याप्त स्टोरेज क्षमता नहीं है। सोमवार को कीमतें 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने के बाद जी-7 देशों ने भी कहा कि तेल की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए कदम उठाए जा सकते हैं, हालांकि फिलहाल तेल भंडार जारी करने को लेकर कोई निर्णय नहीं लिया गया है।