Mahashivratri 2026: 1, 11, 21 या 108 बेलपत्र? महाशिवरात्रि पर शिवलिंग पर कितने बेलपत्र अर्पित करना होता है शुभ? जानें

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Mahashivratri 2026: 1, 11, 21 या 108 बेलपत्र? महाशिवरात्रि पर शिवलिंग पर कितने बेलपत्र अर्पित करना होता है शुभ? जानें

Mahashivratri Puja 2026: महाशिवरात्रि का पावन पर्व भगवान शिव की उपासना के लिए सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन भक्त व्रत रखकर जप, ध्यान और अभिषेक करते हैं तथा शिवलिंग पर बेलपत्र अर्पित करते हैं। अक्सर श्रद्धालुओं के मन में यह प्रश्न उठता है कि 1, 11, 21 या 108 में से कितने बेलपत्र चढ़ाना शास्त्रों के अनुसार अधिक शुभ माना गया है। आइए जानते हैं इसका धार्मिक महत्व और सही नियम।

बेलपत्र अर्पण का महत्व:-

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बेलपत्र भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। इसे अर्पित करने से शिवजी शीघ्र प्रसन्न होते हैं, कष्ट दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। बेलपत्र की शीतलता शिव के उग्र स्वरूप को शांत करने का प्रतीक मानी जाती है।

शिवलिंग पर कितने बेलपत्र चढ़ाएं?

शास्त्रों के अनुसार शिवलिंग पर बेलपत्र हमेशा विषम संख्या में अर्पित करने चाहिए। 3, 5, 7, 11, 21, 51 या 108 बेलपत्र चढ़ाना शुभ माना जाता है। 11 बेलपत्र सामान्य पूजा के लिए शुभ माने जाते हैं। 21 या 51 बेलपत्र विशेष कार्य सिद्धि के लिए अर्पित किए जाते हैं। 108 बेलपत्र विशेष मनोकामना पूर्ति और आध्यात्मिक सिद्धि के लिए चढ़ाए जाते हैं।

यह भी मान्यता है कि यदि सच्ची श्रद्धा हो तो तीन पत्तियों वाला एक बेलपत्र अर्पित करना भी 108 बेलपत्र के समान फल देता है। बेलपत्र की तीन पत्तियां शिव के त्रिनेत्र, त्रिशूल और त्रिगुण स्वरूप का प्रतीक हैं।

बेलपत्र अर्पित करते समय इस मंत्र का जाप:-

“त्रिदलं त्रिगुणाकारं त्रिनेत्रं च त्रयायुधम्।
त्रिजन्मपापसंहारं एकबिल्वं शिवार्पणम्॥”

इस मंत्र के साथ अर्पित किया गया बेलपत्र अत्यंत पुण्यदायी माना गया है।

महाशिवरात्रि 2026 का शुभ मुहूर्त:-

हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी 2026 को शाम 05:04 बजे से शुरू होकर 16 फरवरी 2026 को शाम 05:34 बजे तक रहेगी। मुख्य पूजा रात्रि के निशिता काल में की जाती है। 16 फरवरी की रात्रि 12:09 बजे से 01:01 बजे तक निशिता काल रहेगा। इस समय शिवलिंग का अभिषेक और विशेष पूजन करना अत्यंत शुभ माना गया है।