ट्रम्प का बड़ा दावा: गाजा से हटेगी इजरायली सेना, ‘बोर्ड ऑफ पीस’ के तहत हमास के निरस्त्रीकरण पर बनी सहमति

यरूशलम/वॉशिंगटन। Rkhabar
मध्य पूर्व में लंबे समय से जारी इजरायल-हमास संघर्ष के बीच एक बड़ा कूटनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि गाजा में स्थायी शांति स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। ट्रम्प के अनुसार, नवगठित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ (Board of Peace) के माध्यम से हमास और अन्य सशस्त्र संगठनों के पूर्ण निरस्त्रीकरण (Disarmament) पर सहमति बन गई है। यदि यह समझौता पूरी तरह लागू होता है तो इसके तहत गाजा से इजरायली सेना की चरणबद्ध वापसी, अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था और नए फिलिस्तीनी प्रशासन को सत्ता हस्तांतरण का मार्ग प्रशस्त होगा।
हालांकि, इस समझौते के संबंध में स्वतंत्र और आधिकारिक स्तर पर सभी पक्षों की पुष्टि सामने आना अभी बाकी है।
ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर किया दावा
डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर इस समझौते की जानकारी साझा करते हुए इसे मध्य पूर्व में स्थायी शांति की दिशा में ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि यह उनकी बहुचर्चित ’20-पॉइंट गाजा प्लान’ का अहम हिस्सा है, जिसका उद्देश्य गाजा में युद्ध समाप्त कर स्थिर प्रशासन स्थापित करना है।
ट्रम्प ने कहा कि लंबे समय से जारी संघर्ष ने लाखों लोगों के जीवन को प्रभावित किया है और अब गाजा को हिंसा से निकालकर विकास और पुनर्निर्माण की दिशा में ले जाने का समय आ गया है।
तीन चरणों में लागू होगी पूरी योजना
ट्रम्प द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार प्रस्तावित योजना को तीन चरणों में लागू किया जाएगा।
पहला चरण:
गाजा में मौजूद हमास और अन्य सभी सशस्त्र संगठनों के हथियार एक तय प्रक्रिया के तहत जमा कराए जाएंगे और उनका पूर्ण निरस्त्रीकरण किया जाएगा।
दूसरा चरण:
निरस्त्रीकरण प्रक्रिया पूरी होने के बाद इजरायली रक्षा बल (IDF) गाजा से चरणबद्ध तरीके से अपनी सैन्य वापसी शुरू करेगा।
तीसरा चरण:
गाजा की सुरक्षा व्यवस्था अंतरराष्ट्रीय स्थिरता बल (International Stabilization Force) और नई फिलिस्तीनी पुलिस के संयुक्त नियंत्रण में होगी। इसके बाद प्रशासनिक जिम्मेदारी एक नए फिलिस्तीनी प्रशासन को सौंपी जाएगी, जो ‘बोर्ड ऑफ पीस’ के सहयोग से पुनर्निर्माण और शासन का कार्य संभालेगा।
मिस्र, कतर और तुर्किये की मध्यस्थता का किया जिक्र
ट्रम्प ने इस पहल की सफलता का श्रेय अपनी टीम के साथ-साथ मिस्र, कतर और तुर्किये को भी दिया। उन्होंने कहा कि इन देशों ने वार्ता को आगे बढ़ाने और दोनों पक्षों के बीच संवाद कायम रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उन्होंने 7 अक्टूबर के हमलों का उल्लेख करते हुए कहा कि भविष्य में गाजा से किसी भी प्रकार का सुरक्षा खतरा पैदा न हो, इसके लिए नई व्यवस्था तैयार की जा रही है।
क्या है ‘बोर्ड ऑफ पीस’?
‘बोर्ड ऑफ पीस’ एक नया अंतरराष्ट्रीय मंच बताया जा रहा है, जिसकी अवधारणा डोनाल्ड ट्रम्प ने विश्व आर्थिक मंच (WEF) की दावोस बैठक के दौरान प्रस्तुत की थी। प्रारंभ में इसका उद्देश्य केवल गाजा संघर्ष के समाधान तक सीमित था, लेकिन बाद में इसे वैश्विक मध्यस्थता मंच के रूप में विकसित करने की योजना सामने आई।
बोर्ड में कौन-कौन शामिल?
ट्रम्प के अनुसार बोर्ड में कई प्रमुख अंतरराष्ट्रीय हस्तियां शामिल हैं। इनमें—
अध्यक्ष – डोनाल्ड ट्रम्प
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो
विशेष दूत स्टीव विटकॉफ
ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर
जेरेड कुशनर
बताया गया है कि लगभग 35 देशों ने इस पहल में सहयोग की सहमति जताई है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठ रहे सवाल
हालांकि इस पहल को लेकर कई देशों ने सावधानी बरतने की बात कही है। कुछ यूरोपीय देशों का मानना है कि संयुक्त राष्ट्र जैसी स्थापित अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की भूमिका को नजरअंदाज कर किसी नए मंच के माध्यम से ऐसे समझौते लागू करना वैश्विक कूटनीतिक व्यवस्था के लिए चुनौती बन सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी शांति समझौते की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि सभी संबंधित पक्ष उसकी शर्तों को स्वीकार करें और उसका पूरी तरह पालन करें।
गाजा के भविष्य पर रहेगा असर
यदि ट्रम्प द्वारा किया गया दावा व्यवहारिक रूप से लागू होता है और सभी पक्ष इस प्रक्रिया का पालन करते हैं, तो यह मध्य पूर्व के इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण शांति प्रयासों में से एक साबित हो सकता है। इससे गाजा में पुनर्निर्माण, विस्थापित लोगों की वापसी, मानवीय सहायता और स्थायी प्रशासन स्थापित करने का रास्ता खुल सकता है।
हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जमीन पर हमास के पूर्ण निरस्त्रीकरण, इजरायली सेना की वापसी और नई सुरक्षा व्यवस्था के प्रभावी क्रियान्वयन जैसी कई चुनौतियां अभी बाकी हैं। इसलिए आने वाले दिनों में इस समझौते पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय और संबंधित पक्षों की आधिकारिक प्रतिक्रियाएं काफी महत्वपूर्ण रहेंगी।