नई दिल्ली, पीएम नरेंद्र मोदी आज सुबह 11 बजे एक बार फिर रेडियो कार्यक्रम मन की बात में देश को संबोधित किया। पीएम ने कहा, “आप लड़ रहे हैं, जनता के साथ मिलकर शासन, प्रशासन लड़ रहा है।
पीएम मोदी ने कहा, “कोरोना से लड़ाई के इस दौर में कई ऐसे पहलू जानने को मिले जिस पर आपाधापी में ध्यान ही नहीं जाता. भारत में कोरोना के खिलाफ लड़ाई पीपल ड्रिवन है। यह लड़ाई जनता लड़ रही है। सरकार ने covidworriors.gov.in प्लेटफॉर्म के माध्यम से सिविल सोसाइटी के प्रतिनिधि और स्थानीय प्रशासन को जोड़ दिया है, इसमें अब तक सवा करोड़ लोग जुड़ चुके हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि हम भाग्यशाली हैं कि आज पूरा देश, देश का हर नागरिक, जन-जन इस लड़ाई का सिपाही है और लड़ाई का नेतृत्व कर रहा है। आज पूरा देश, एक लक्ष्य, एक दिशा के साथ आगे बढ़ रहा है।
“ताली-थाली, दीया मोमबत्ती से लोगों में भावनाएं जगीं। शहर हो या गांव ऐसा लग रहा है जैसे देश में महायज्ञ चल रहा है। जिसमें हर कोई योगदान देने को आतुर है। हमारे किसान भाई बहन दिन रात खेतों में मेहनत कर रहे हैं और चिंता कर रहे हैं कि कोई भी भूखा न सो जाए। कोरोना से लड़ाई में देशवासियों की पीएम मोदी ने तारीफ की. उन्होंने कहा, “कोई तनख्वाह दान दे रहा है, कोई मास्क बना रहा है तो कोई खेत की सब्जियां दान दे रहा है। कोई जिस स्कूल में क्वारंटीन में है, उसकी रंगाई-पुताई कर रहा है. यही भाव कोरोना के खिलाफ लड़ाई को ताकत दे रहा है।
पीएम ने कहा, “आज भारत के आयुर्वेद को भी लोग विशिष्ट भाव से देख रहे हैं। कोरोना की दृष्टि से इम्युनिटी बढ़ाने के लिए जो प्रोटोकॉल दिया है मुझे विश्वास है कि आप इसका उपयोग कर रहे होंगे। इससे ऊपर जब कोई अपने हक की चीज दूसरों की मदद करते हैं और खुद की चिंता छोड़कर अपने हिस्से को बांटकर दूसरों की जरूरत पूरी करता है वही तो संस्कृति है। कई बार हम अपनी शक्तियों को मानने से इनकार कर देते हैं और जब दूसरा देश रिसर्च करके वही बात बताता है तो हम मान लेते हैं। इसके पीछे कारण सैंकड़ों साल की गुलामी भी रही है। भारत की युवा पीढ़ी को इस चुनौती को स्वीकार करना होगा। जैसे विश्व ने योग को स्वीकार किया है, वैसे ही आयुर्वेद को विश्व जरूर स्वीकार करेगा।
सोशल मीडिया पर हम देख रहे हैं कि लोग लॉकडाउन के दौरान अपने साथियों को याद कर रहे हैं। उनकी मदद भी कर रहे हैं और उन पर लिख रहे हैं। लोग सफाई कर्मचारियों पर पुष्पवर्षा कर रहे हैं। हमारे डॉक्टर और पुलिस व्यवस्था को लेकर आम लोगों की सोच में काफी बदलाव हुआ है। पहले पुलिस के बारे में सोचते ही नकारात्मकता के खिलाफ कुछ नजर नहीं आता था, आज हमारे पुलिस कर्मचारी लोगों तक खाना पहुंचा रहे हैं। देशभर में चिकित्सा जगत से जुड़े लोगों ने अध्यादेश पर संतोष व्यक्त किया है। इस अध्यादेश में चिकित्सा कर्मचारियों के खिलाफ हिंसा पर कड़ी सजा के प्रावधान किए गए हैं।
पीएम मोदी ने कहा, “इस साल अक्षय तृतीया का विशेष महत्व है। यह याद दिलाता है कि हमारी भावना अक्षय है, चाहे कितनी भी आपदा आए इससे जूझने की मानवीय भावनाएं अक्षय हैं। माना जाता है कि यही वह दिन है जब पांडवों को अक्षय पात्र मिला था। हमारे अन्नदाता किसान इसी भावना से परिश्रम करते हैं। इन्हीं की वजह से हमारे पास अन्न के भंडार हैं।
पीएम ने कहा, “दो गज की दूरी, बहुत है जरूरी कामना करते हैं कि अगली बार जब हम मिलें तो दुनियाभर से कोरोना से मुक्ति की खबरें मिले।
रमजान का भी पवित्र महीना शुरू हो गया है। किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि रमजान में इतनी बड़ी मुसीबत होगी, लेकिन जब विश्व में मुसीबत आ ही गई है तो हमें इसे सेवाभाव की मिसाल देनी है। हम पहले से ज्यादा इबादत करें और कोरोना के खिलाफ लड़ाई को मजबूत करें।
पीएम ने कहा मैं आपसे आग्रह करूंगा कि हम कतई ज्यादा आत्मविश्वास में न फंस जाएं। हम यह भ्रम न पालें कि हमारे यहां कोरोना नहीं पहुंचा, इसलिए अब नहीं पहुंचेगा, ऐसी गलती न करें. हमारे यहां कहा जाता है, सावधानी हटी, दुर्घटना घटी. हमारे पूर्वजों ने कहा है, हल्के में लेकर छोड़ दी गई आग, कर्ज और बीमारी, मौका पाते ही दोबारा बढ़कर खत्म हो जाती है, इसलिए इसका पूरी तरह उपचार जरूरी होता है।